रिसाव की मरम्मत

सारा दिन में हमारा कितना रिसाव होता रहता है? हम्म नहीं, मेरा अर्थ आपके निचले भाग से नहीं, लेकिन आपके ऊपरी हिस्से से! हमारे मन से कितना रिसाव होता रहता है? और हमें मालूम कैसे होगा कि ऊर्जा का रिसाव हो रहा है?
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मन में हो रहे रिसाव की पहली निशानी है उदासी और दुख – हमारी खुशी के अनुपात में कमी! अगर बैंक का खाता बढ़ रहा है तो हमें खुशी मिलती है तो क्या दिवालियापन हमें दुख नहीं देगा? उसी प्रकार, जब मन सकारात्मक और शक्तिशाली संकल्पों से भरपूर है तो यह हमारे मन को खुशी और अचरज से भर देगा । जब हम उस शक्ति को थोड़ा भी खोते हैं तो एक कमी की और नुकसान की भावना आने लगती है ।
रिसाव अक्सर किसी कीमती वस्तु के संदर्भ में प्रयोग होता है जो बह जाती है, कीमती स्रोत जैसे जल या तेल । हमारे मन में भी, हमारे विचार कीमती होते हैं । जो अपना समय मेडिटेशन में बिताते हैं उन्होंने विशेष रूप से और जागृत अवस्था में अपने विचारों को उत्पन्न किया है । अगर हम ध्यान नहीं रखते तो वह सारी बहुमूल्य ऊर्जा बह जाऐगी ।

रिसाव की ओर ध्यान देना ही उपाय है । यहाँ कुछ सामान्य ‘बाल्टी के छिद्रों’ का उल्लेख है ।
बहुत अधिक व्यर्थ विचार
जब हम बहुत से विचारों को व्यय करते हैं, तो हमें अक्सर इस बात का अहसास नहीं होता कि इस प्रक्रिया में हम बहुत ऊर्जा को खो रहे हैं । जैसे जब हम लापरवाही से पैसा खर्च करते हैं तो उसका हिसाब रखना मुश्किल हो जाता है और इससे पहले कि हमें होश आए हम कड़के हो चुके होते हैं! तो विचारों को कम और साधारण रखें, शक्तिशाली और उद्देश्यपूर्ण रखें ।

नकारात्मकता नहीं
नकारात्मकता हमारी ऊर्जा को बहा ले जाती है । नकारात्मक सोचना किसी भी प्रकार से अर्थपूर्ण नहीं है, सिवाय इसके कि जब आप खतरों का मूल्यांकन कर रहे हो! तब भी हम यह नही जानते कि हम ठीक हैं या गलत हैं! नकारत्मक ऊर्जा हमें थका देती है और कमज़ोर बना देती है । यह कहना ‘मैं नहीं कर सकता/सकती’, या ‘यह कभी नहीं होता’ का अर्थ है मेरी दृष्टि और रवैया नकारात्मक पर ही केंद्रित है । अगर हम समस्या की ऊर्जा में ही अटके हैं तो हमें कभी भी समाधन नहीं मिलेगा ।

जाने दें
पुरानी पीड़ाओं को पकड़ कर बैठना और बदला लेने पर विचार करते रहने से मन को कोई मदद नहीं मिलेगी । असल में पुरानी बातों को पकड़ कर रखने से बहुत सी ऊर्जा व्यर्थ चली जाती है । सप्ताह दर सप्ताह अपने सारे पुराने सामान को पकड़ कर रखने की कल्पना करें । यह वह सामान है जो आपको नहीं चाहिए, जो लाभदायक नहीं है और फिर भी आपने इसको रखने का निर्णय किया है और आपको इसे रखने की कुछ कीमत भी चुकानी पड़ रही है – इस बात का कोई लाभ नहीं है । जाने दें! आपको बहुत हल्का लगेगा, आपको स्वतंत्रता का आभास होगा और भविष्य में निरंतर पीड़ा देने वाले और चिन्ता के विचारों का खर्चा भी नहीं होगा ।
राय बनाना और तुलना करना
जब हम स्वयं की तुलना दूसरें से करते हैं या दूसरों के बारे में कोई राय बना लेते हैं तो हम अपनी उपयोगिता और मूल्य को स्वीकार नहीं करते । इसके बजाय हम दूसरों को नीचा दिखा के स्वयं के बारे में बेहतर महसूस करने की कोशिश करते हैं या हम स्वयं को बहुत नीचा महसूस करते हैं । तब मैं ना दूसरों में ना स्वयं में अच्छा देख सकती हूँ । यह स्वाभिमान का रिसाव है । दूसरों को प्रेरणा लेने के उद्देश्य से देखना दूसरी बात है, लेकिन दूसरों को देखकर अपनी कमियों का आकार वर्धन करके देखना सही नहीं है । जब हम तुलना करते हैं और दूसरों की तरह बनने की कोशिश करते हैं तो बहुत सी ऊर्जा का रिसाव हो जाता है । इसके बजाय अपनी महानता पर ध्यान एकाग्र करें । अपने ऊँचे स्वाभिमान में रहें । अपनी शक्तियों में रमण करें ।
शिकायत करना
जब हम निरंतर किसी न किसी बात की शिकायत करते रहते हैं तो हम अपने भीतर के दुख की अभिव्यक्ति कर रहे हैं । फिर हम उत्साह का रिसाव कर देते हैं और हमारे पास ताकत नहीं बचती या अपनी जिम्मेवारी उठाने की इच्छा शक्ति नहीं रहती । शिकायत के स्थान पर सराहना करने से इन छिद्रों को भर सकते हैं और आपका खुशी का स्तर बढ़ जाऐगा ।
जैसे ही हम इन छिद्रों को भरते हैं तो हम सशक्त अनुभव करते हैं । एक लबालब ऊपर तक भरा हुआ टैंक एक रिसाव हो रहे टैंक से भिन्न होता है । बहुत भरे हुए टैंक में भी रिसाव हो रहा है लेकिन उसमें प्रचुरता का अंश है । रिसाव हो रहे टैंक को मरम्मत की आवश्यकता है । तो अगर हम चुनाव करें तो जीवन में भी बहुतायत हो सकती है । लेकिन वह जागृत अवस्था का निर्णय हैं, कोई आपातकाल की मरम्म्त नहीं!!

अब समय है… जो आत्मा को कमज़ोर बना देते हैं उन रिसावों को ढूँढकर मरम्म्त करने का । टैंक को भरने के लिए सकारात्मक ऊर्जा को बहने दें और शीघ्र ही आपके जीवन में प्रचुरता होगी ।
© ‘It’s Time…’ by Aruna Ladva, BK Publications London, UK
