सकारात्मकता की शक्ति आपके हाथों में है

यह बहुत आवश्यक है कि हम सदा सकारात्मक मनोदशा में रहें । हमारे लिए यह हम स्वयं ही कर सकते हैं क्योंकि हमारे मन का बटन हमारे ही पास है । जब भी कोई परिस्थिति उभरती है तो उसमें घबराने से, नकारात्मक होने या परेशान होने से कोई फायदा होने वाला नहीं है । जो कुछ भी आपको करना है बस उस पर ध्यान केंद्रित करें और सफलता स्वत: ही पीछे आऐगी ।
नीचे कुछ वाक्य दिये हैं जिन्हें हम किसी भी परिस्थिति में दृढ़तापूर्वक कह सकते हैं । हम मन की शान्त अवस्था में, आस्था और दृढ़ विश्वास से उन्हें दोहराते हैं । किसी को बताने की आवश्यकता नहीं है । यह शांति, वृत्ति और कार्य करने की मंशा के लिए भोजन का कार्य करती है । जब मैं सकारात्मक विचार सोचना आरंभ करती हूँ तो उन विचारों और भावनाओं की लहरें संसार में उठती हैं और सकारात्मक प्रकम्पन्न उत्पन्न होते हैं । दूसरों को भी उनका आभास होता है और समय के साथ वे भी सकारात्मक होने लगते हैं । जीवन को सकारात्मक सोच के अमृत से सींचने की आवश्यकता है ।
इतने वर्षों में मैंने यही पाया है कि इस प्रकार का नज़रिया शांति और खुशी बरकरार रखने में बहुत सहायक है । मैं वास्तव में स्व से सकारात्मक बातचीत करने में विश्वास करती हूँ ।

यहाँ कुछ विचार हैं जो आपको आपके मार्ग में सहायक सिद्ध होंगे ।
जो आप चाहते हैं वह नहीं पा सकते?
चाहे सम्बन्ध या वस्तुऐं; हम उनको पाने के लिए संघर्ष करते हैं, और फिर उनको रखने और उनको सहारा देने का प्रयास करते हैं! इन शब्दों का प्रयोग करें: जो कुछ भी मुझे चाहिए उसे आकर्षित करने की हर युक्ति मेरे पास है । केवल धन ही वह साधन नहीं है जिससे मेरी इच्छाओं की पूर्ति हो सके, दूसरे भी हज़ारों रास्ते हैं । जो कुछ भी मुझे चाहिए उसे आकर्षित करने में मैं रचनात्मक हूँ । मैं लायक हूँ, जो कुछ भी मुझे चाहिए वह मुझे आसानी से प्राप्त हो जाता है । मेरे सभी सम्बन्ध बहुत मधुर हैं और हर प्रकार की प्रचुरता है ।
बिल भरने के लिए पैसे नहीं हैं?
आप स्वयं से कह सकते हैं, “मेरे पास सब कुछ पर्याप्त है । मेरे पास धन आ रहा है । बिल भरने के लिए मेरे पास अथाह धन है । मैं प्रवाह को देख रहा हूँ । मैं प्राप्त करने के उपयुक्त हूँ और आराम से रहना मेरा अधिकार है ।”
कोई आपको समझता नहीं है?
बहुत बार, कुछ लोगों के साथ ऐसा लगता है कि आप अपना सिर दीवार पर मार रहे हो! अगर ऐसा है तो इन वाक्यों को प्रयोग करें । “मुझे हर कोई समझता है । मैं स्पष्ट हूँ! मैं स्पष्ट देख पा रहा हूँ और वे भी साफ़ तौर पर उसे देख रहे हैं । वे तीव्रबुद्धि और समझदार हैं । बस वे समझने ही वाले हैं। मेरा धैर्य रंग लाऐगा ।”
किसी को क्षमा नहीं कर पा रहे?
जब आपको लग रहा है कि आप किसी को क्षमा नहीं कर पा रहे, तो अक्सर इसका अर्थ है कि आपको किसी बात के लिए स्वयं को क्षमा करना है । तो चलिए इससे आरम्भ करते हैं । “मैं स्वयं को बहुत प्रेम करता हूँ तो सबसे पहले मैं स्वयं को क्षमा करता हूँ । मेरा हृदय बहुत विशाल है । ऐसा हृदय जो इतना भरपूर है कि किसी को भी क्षमा कर सकता है । मैं शक्तिशाली हूँ इसलिए मैं क्षमा कर देता हूँ । क्षमा करने में मैं पहला कदम उठाउगा ।आपके बच्चे आपकी बात नहीं सुनते?
ओह, ऐसा कितनी बार हमने सुना है? सच्चाई यह है कि कमी उनमें है या हममें है? “मैं अपने बच्चों से प्रेम करता हूँ । वे मेरे प्रेम को महसूस करते हैं । जो कुछ भी मैं उनको समझाता हूँ उसमें वे मेरी पावन मंशा को महसूस कर सकते हैं । वे मेरे शब्दों के पार देख सकते हैं । वे मेरी देखभाल और पथपदर्शन को समझ पा रहे हैं । वे मेरे इरादों को समझते हैं । मेरे बच्चे बहुत अच्छे, तीव्रबुद्धि और समझदार हैं । उनमें अच्छी आदतें हैं और वे आदरपूर्वक व्यवहार करते हैं ।”

चाबियाँ गुम हो गई?
मानों उदाहरण के लिए आपकी चाबियाँ गुम हो गई । तो आप स्वयं को कह सकते हैं, “मैं बहुत शांत हूँ । कुछ ही मिनटों में चाबियाँ मेरे सामने आने वाली हैं । वे जल्दी ही स्वयं को मेरे सामने प्रत्यक्ष कर देंगी । मैंने स्वयं को पा लिया है तो कैसे मैं कुछ भी गुम कर सकता हूँ! वस्तुओं को पाने में मैं हमेशा से ही भाग्यशाली हूँ । प्रत्येक वस्तु मेरे पास आसानी से आ जाती है ।”
अपने सम्बन्ध या अपनी शादी सुधारना चाहते हैं?
संसार में सब कुछ टूटता जा रहा है और सम्बन्ध कोई अपवाद नहीं हैं । अगर सम्बन्धों को हम सकारात्मक ऊर्जा से भरपूर नहीं करते तो वे बिखर सकते हैं । “वह मेरा/मेरी अच्छा/अच्छी मित्र है । मेरी शादी बहुत खुशहाल मिलाप है । मैं इस बात की बहुत सराहना करता हूँ । वह मेरे साथ बहुत बहुत अच्छा बर्ताव करता/करती है । हमारे बीच में प्रकाश है । हमारे बीच में प्रेम है । मैं बहुत भाग्यशाली हूँ कि मुझे जीवन में इनका साथ मिला । मैं बहुत खुश हूँ ।”
सफलता नहीं मिल रही?
“सफलता मेरा जन्मसिद्ध अधिकार है । सफलता परछाई की तरह मेरा पीछा करती है । जो कुछ भी मैं करता हूँ उसमें मुझे सफलता मिलती है । सफलता का मेरे लिए सम्पूर्ण नया अर्थ है, अगर मैं नहीं तो और कौन? मैं सफलतामूर्त हूँ ।”
आप खुश नहीं हैं?
“मेरी खुशी दिनप्रतिदिन बढ़ती जा रही है । खुशी यहीं इसी पल में है! मेरी खुशी को मापा नहीं जा सकता । खुशी मेरा असली स्वभाव है । खुश होने और धन्यवाद करने के लिए मेरे पास बहुत कुछ है । मैं केवल खुश और सकारात्मक विचार ही उत्पन्न करता हूँ । खुशी ही मेरी पहचान है । मैं ही खुशी हूँ । खुश होने के मेरे पास बहुत से कारण हैं । मैं खुशहाल लोगों से घिरा हूँ । मैं खुश हूँ क्योंकि मैं हूँ ।”
तो जैसा कि आप देख सकते हैं कि इन साधारण सकारात्मक विचारों को उत्पन्न करना बहुत सहज है । इनसे आरम्भ करें, चाहे आप इन्हें अनुभव ना भी करें, क्योंकि कहीं तो सकारात्मक विचारों से हमें शुरूआत करनी होगी चाहे उस बात पर अभी तक हमारा सम्पूर्ण विश्वास नहीं है ।
जो कुछ आप चाहते हैं और कैसे उस बात को कार्यांवित करना चाहते हैं उस पर अधिक ध्यान केंद्रित करें । उस पर ध्यान नहीं दें जिस बात में सफलता नहीं मिल रही या जो नकारात्मक है । क्योंकि जिस बात पर आप ध्यान लगाते हैं अर्थात उसे जीवन देते हैं ।
कुछ आनंद लीजिए । अब अपने व्यक्तिगत जीवन और समस्याओं से सम्बन्धित अपने स्वयं के सकारात्मक वाक्यों का निर्माण करें । आपको कामयाबी मिले!
अब समय है… नकारात्मक को जाने देने का और उसके स्थान पर सकारात्मक को स्थान देने का । उस पर ध्यान एकाग्र नहीं करें जो आप नहीं चाहते बल्कि उस पर करें जो आप चाहते हैं और फिर देखें आपके जीवन में ऊर्जा कैसे प्रवाहित होती है ।

© ‘It’s Time…’ by Aruna Ladva, BK Publications London, UK
