मनोभाव (Atttitude in Hindi)

मनोभाव

मनोभाव को किसी भी रूप में देखा जा सकता है चाहे कुछ नकारात्मक, या कुछ ‘कूल’ और मनचाहा – यह आपके मनोभाव पर निर्भर करेगा!

मूल रूप से इस शब्द का अर्थ किसी मनुष्य के स्वभाव और तरीके से है, लेकिन आधुनिक संदर्भ में इसका अर्थ निर्भयता साबित करने से, ढिठाई या अभिमान से है ।

Listen to the audio

 

परन्तु इसके मनोविज्ञान में जाऐ बिना, असलियत में, किसी न किसी समय हरेक में ही मनोभाव होता है, बस यह इस बात पर निर्भर करता है कि वह हरेक के लिए प्रत्यक्ष है या नहीं । किसी व्यक्ति के मनोभाव का अंदाज़ा उसके शब्दों के चुनाव, उनकी आदतों से, या वे लोगों से कैसे व्यवहार करते हैं, से लगाया जा सकता है ।

जैसे कोई व्यक्ति दिल का बहुत अच्छा होगा लेकिन उनके व्यवहार से स्पष्ट झलकता है कि वे स्वयं को उत्कृष्ठ मानते हैं, ‘तुमसे बेहतर’ का भाव होता है, हमेंशा व्यस्त रहना और दूसरों के लिए समय न होने का भाव होता है । यह सम्भव है कि उनके बेहतर पहलू पर आप सहृदय से प्रतिक्रिया दे देंगे, लेकिन आप उनके मनोभाव के लिए उन्हें नापसंद करते हैं ।

किसी भी परिस्थिति के प्रति अपनी स्थिति को व्यक्त करना ही मनोभाव है । मैं य‍ह महसूस कर सकती हूँ कि यहाँ हर कोई बहुत आलसी है क्योंकि कोई काम होता दिखाई नहीं देता । यह मेरे मन में चिड़चिड़ेपन और तिरस्कार का मनोभाव पैदा कर देता है और यही निर्धारित करेगा कि मैं उनके कर्मों की किस प्रकार व्याख्या करती हूँ, किस प्रकार मैं उनसे बात करती हूँ – शायद उपेक्षा से या तिरस्कार से । और, दूसरी ओर अगर मैं अपनी स्थिति इस ओर रखती हूँ कि हर कोई दिल का बहुत अच्छा है और अपनी ओर से पूरा प्रयास कर रहा है, फिर मेरे सकारात्मक मनोभाव का अर्थ होगा कि उनके प्रति मेरा व्यवहार सराहना का, आदर का और प्रोत्साहन का होगा ।

दूसरा उदाहरण है कि अगर मुझे ऐसा लगता है कि मेरे काम में बस समय की बर्बादी होती हैं, इससे किसी उद्देश्य की पूर्ति नहीं होती, यह अर्थहीन है, इससे मैं इसे नापसंद करना आरंभ कर दूँगी । प्रतिदिन काम पर जाना मुझे घृणास्पद लगेगा और अपनी कंम्पनी में कुछ सहयोग देने का, अपना बेहतरीन प्रदर्शन करने और नैतिकता के लिए मैं बहुत कम पुरूषार्थ करूँगी । अगर दूसरी ओर मैं महसूस करूँ कि अभी के लिए यह कार्य ठीक है, इससे मेरे जीवनयापन के लिए धन प्राप्त हो रहा है और इससे मुझे काम का अनुभव भी मिल रहा है, निस्संदेह यह काम मेरे लिए आदर्श नहीं है लेकिन मुझे इसका पूरा फायदा उठाना है और काम पर खुशी से और धन्यवाद का भाव लिए जाऊँगी ।

निस्संदेह हमारी स्थिति को निर्धारित करने में अहंकार बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है । अहंकार सदा ही स्वयं को ठीक समझता है और दूसरे को गलत । हमें अहंकार से सावधान होना होगा और झूठी स्थिति, जैसे कि मैं सबसे बेहतरीन हूँ और मैं ही ठीक हूँ और मैं निपुण हूँ, धारण करने से बचना होगा । क्योंकि इस लेंस से, दूसरा कोई भी ठीक दिखाई नहीं देगा, और मैं भ्रमजाल में अपना जीवन व्यतीत करती रहूँगी!

एक बहुत रोचक अभ्यास है, मेज के पास बैठकर 3 का अंक लिखें । जो व्यक्ति आपके दायें तरफ बैठा होगा वह उसे ‘W’ के रूप में पढ़ेगा । आपके बायें ओर बैठा व्यक्ति उसे ‘M’ के रूप में पढेगा । अंत में, जो आपके सामने बैठा होगा वह अरबी में 4 का अंक पढ़ेगा (अगर उसे अरबी आती है तो!) । तो सब कुछ हमारे दृष्टिकोण पर निर्भर करता है । सिर्फ आप ही सही नहीं हैं, लेकिन आप सभी सही हो ।

किसी प्रकार का मनोभाव रखना रंगबिरंगे चश्में पहनने जैसा है । जब मैंने हरा पहना है तो मुझे पूरा विश्वास है कि सब कुछ हरा है । और जब मैंने लाल रंग के पहने हैं तो सबकुछ लाल है; वह हरा नहीं हो सकता ।

असल में, परिस्थिति तो जैसी है वैसी ही है; यह मेरा मनोभाव है जिससे खुश, शांतीपूर्ण, आनंदमयी जीवन बनाना निर्भर करता है, या निराशाजनक और दर्द और दुख से भरा हुआ । तो सबकुछ मेरे उपर निर्भर करता है । और लोग भी उसी प्रकार जीवन बिताऐंगे, चाहे ऊँचा… या नीचा…उनके प्रति मेरा जिस प्रकार का मनोभाव होगा ।

क्या मैं अपना मनोभाव बदल सकती हूँ? निस्संदेह मैं बदल सकती हूँ । मुझे इस बात को समझने का विवेक चाहिए कि जिस प्रकार के मनोभाव को मैंने धारण किया हुआ है वह मेरे लिए लाभदायक है या नहीं, इससे मुझे प्रेम मिल रहा है, दोस्ती, सहारा हासिल हो रहा है या नहीं । कभी कभी यह इतना साधारण होता है जैसे कि अपनी सोच में बदल लेने से मनोभाव में बदलाव आ जाता है । शायद एक परिस्थिति को किसी दूसरे के दृष्टिकोण से देखने से मेरा मनोभाव बदलने में मुझे मदद मिलेगी ।

अब समय है… अपना मनोभाव बदलने का ।

 

© ‘It’s Time…’ by Aruna Ladva, BK Publications London, UK

 

 

 

0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest

0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments