जिसका प्रतिरोध होगा वह डटा रहेगा – Resist and it Persists (in Hindi)

जिसका प्रतिरोध होगा वह डटा रहेगा

अक्सर हम अपने जीवन की योजना बनाते हैं, लेकिन जैसी हमने आशा की थी जीवन उस प्रकार से सहयोग नहीं देता! हमारी ज़िन्दगी हमेशा उस प्रकार नहीं घटती जैसे कि हमने कल्पना की थी, अक्सर निराशा और उदासी आ जाती है ।

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अक्सर हम अपने वांछित परिणाम पर इतने अटक जाते हैं, फिर जब भी ज़िन्दगी हमें कुछ और बेहतर की ओर जाने का इशारा करती है, फिर भी हम दूसरे विकल्प को अनदेखा कर देते हैं । हम लहरों के विपरीत जा रहे हैं और समझ नहीं आता कि जैसा हम चाहते हैं वैसा क्यों नहीं हो रहा । हम क्रोधित और निराश भी हो जाते हैं । हम शक्ति और उम्मीद दोनों ही गंवा देते हैं । बेचैनी और हताशा आ घेरती है । फिर हमें अचम्भा होता है कि क्या हुआ! अच्छा, तो इसे प्रतिरोध करना कहा जाता है!

जब जीवन हमें कुछ सीखाने का प्रयास कर रहा है और हम उसका प्रतिरोध करेंगे तो वह बात तब तक डटी रहेगी जब तक हम वह सबक न सीख लें । क्या कभी आपने अपना विभाग या नौकरी इस कारण से बदली है क्योंकि किसी व्यक्ति के साथ आपकी बनती नहीं थी, लेकिन आपने पाया कि यही बात अगली नौकरी में भी हुई! इसका अर्थ है कि ब्रहमांड जो पाठ हमें सीखाना चाहता था वह हमने नहीं सीखा! क्योंकि जीवन महान है और इसे मालूम है कि हमें किस बात को जानने की आवश्यकता है और आखिरकार क्या हमारे लिए बेहतर होगा । ज़िन्दगी, हमारा साथ दे कर, हमें आगे बढ़ाने में और विकसित करने में सहयोग देकर हम पर अहसान कर रही है, लेकिन फिर भी कभी कभी इसे हम विश्वासघाती प्रतिद्वंद्वी के रूप में देखते हैं जो हमें हराने के लिए तैयार है । ज़िन्दगी और इस के इशारों का अनुकरण करने के लिए हमें पर्याप्त विश्वास नहीं है, इसके बदले हम इसका प्रतिरोध करते हैं और इसके प्रयासों को ठुकरा देते हैं ।

जीवन की शिक्षाओं का प्रतिरोध करना अर्थात प्रवाह के विपरीत जाना । धारा के प्रतिकूल बहना धारा के अनुकूल बहने से सदा ही मुश्किल होता है । जितना जितना हम प्रगति करते जाऐंगे उतना ही नदी हमें पीछे धकेलेगी ।

तो हमें कैसे पता चलेगा किस बात के लिए दबाव डालना है, किस बात को जाने देना है और प्रवाह के साथ बहना है? जब हमारे वांछित लक्ष्य संघर्ष बन जाते हैं और ऐसा लगने लगता है कि सारी ऊर्जाऐं हमारे खिलाफ हैं तब हमें दोबारा सोचने की आवश्यकता है । जब चीज़ें सुचारू रूप से चल रही हैं और हर कोई हमारे साथ है और हमारे प्रोजेक्ट के लिए हमें अपना आर्शीवाद दे रहा है, जब ‘महसूस’ हो कि सब ठीक और सहज है, तब हम कह सकते हैं कि ऊर्जाऐं प्रवाहित हो रही हैं और हम सही दिशा में जा रहे हैं ।

क्या हम प्राकृतिक प्रवाह का प्रतिरोध कर रहे हैं, और इसलिए अपने जीवन को और भी मुश्किल तो नहीं बना रहे, यह जानने के लिए हमें प्रतिदिन आत्मिक स्तर पर स्वयं की गहराई से जाँच करनी चाहिए । स्वयं के साथ खरे और सच्चे रहिए कुछ भी छिपाईए मत! अपनी समस्या के इर्दगिर्द की आशंकाओं और प्रतिबंधक धारणाओं का समाधान करिए । जब हम अधिक जागरूक बन जाते हैं तो प्रतिदिन हम अपनी प्रतिक्रियाओं, शंकाओं और चिड़चिड़ेपन को सही ढ़ंग से संभाल सकते हैं । हम स्वयं को अच्छी रीति समझते हैं और इससे पहले कि कमज़ोरियाँ हम पर विजय पा लें हम कदम बढ़ा कर उन पर विजय हासिल कर लेते हैं ।

स्व-चिंतन के बिना जीवन अधूरा है । ऐसा कैसे हो सकता है कि मैं अपना सारा समय और स्रोत ‘बाहर’ लगा दूँ, और अपने लिए एक पल भी नहीं? अगर मैं स्वयं को अपना मित्र बना लूँ तो मैं बेहतर मनुष्य बन सकता हूँ, और जो लोग मेरे आसपास हैं उनके लिए अच्छा मित्र । मैं किसी और की सहायता के बिना स्वयं का मार्गदर्शन स्वयं ही कर सकता हूँ ।

तो अगली बार आपको संदेह हो कि जीवन आपको कुछ दिखाने का प्रयास कर रहा है तो ठहर जाऐं, देखें और ध्यान से सुनें । ‘जीवन’ केवल हमारे फायदे के बारे में ही सोचता है और इसलिए इसे सुनना फायदेमंद होगा । लेकिन एक अच्छे मित्र की तरह, अगर पहली बार हमने प्रतिरोध किया तो यह तब तक डटा रहेगा जब त‍क हमने सबक नहीं सीखा!

अब समय है… जीवन को सुनने का और इसके दयालु इशारों से समझने का । याद रखें अगर आप प्रतिरोध करेंगे तो वह डटा रहेगा ।

 

© ‘It’s Time…’ by Aruna Ladva, BK Publications London, UK

 

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Ajay
Ajay
8 years ago

Bahut sahi kaha par kuch samjh ki kami he