खुशी को चुनना – Choosing Happiness (in Hindi)

खुशी को चुनना

 

स्व-स्शक्तिकरण की ओर मेडिटेशन पहला कदम है । वे आहा! लम्हें इस बात का अहसास करा सकते हैं कि हमारे जीवन में कुछ बदलने की आवश्यकता है । और तभी हम आंतरिक स्वतंत्रता और खुशी की ओर अपनी यात्रा आरम्भ कर सकते हैं ।

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जब हम किसी यात्रा पर होते हैं, अगर हमने पीछे मुड़ कर नहीं देखा, तो अक्सर हम इस बात से अनभिज्ञ रहते हैं कि हमने कितनी प्रगति की है । लेकिन जब हम स्वयं का निरिक्षण करते हैं तो पाऐंगे कि जहाँ से हमने आरम्भ किया था और जहाँ हम अभी पहुँच गए हैं, इस बीच हमने बहुत लम्बी दूरी तय कर ली है ।

हम इस बात का अहसास करने लग जाते हैं कि हमारे पास चुनाव करने की शक्ति है । चयन से स्वतंत्रता आती है । यह हमें अपने जीवन में बदलाव लाने की शक्ति देती है । मैं केवल उन पुराने और अस्वस्थ विचारों और भावनाओं से दूर होने का चयन करके खुशी का चुनाव कर सकती हूँ । जब तक हमने कुछ आध्यात्मिक सिद्धाँतों को प्रयोग करके नहीं देखा है तब तक वे हमें बकवास लगेंगे । लेकिन, आपको यह जानकर सुखद आश्चर्य होगा कि ये सिद्धाँत वास्तव में काम करते हैं!

अपेक्षाओं का प्रबंधन करने का उदाहरण लें । ये अपेक्षाऐं किसी परिस्थिति के बारे में या यह कि दूसरे व्यक्ति को भिन्न होना चाहिए या उन्हें मेरे साथ अलग व्यवहार करना चाहिए । हमारी अपेक्षाऐं तर्कशील हो सकती हैं, लेकिन अगर हम किसी प्रकार की निराशा, परेशानी या भावनात्मक अशांति का अनुभव कर रहे हैं, तो यह भी अपेक्षा ही है । किसी भी परेशानी के भाव के पीछे निश्चित रूप से अपेक्षा होती है ।

हम स्वयं को यह सोच कर स्वतंत्र कर सकते हैं कि यह व्यक्ति हरेक के साथ ऐसा ही है और यह उसके लिए स्वाभविक है । ऐसा करने से हम जो उसने कहा वह आसानी से जाने देते हैं और दर्द की भावनाऐं अपने हृदय और मन में नहीं रखते । अपने मन को स्वतंत्र करने और स्वयं को फिर से शांति में स्थित करने के लिए केवल इतना करें कि बातों को व्यक्तिगत न लेने का चयन करें ।

लिखने और डायरी रखने से हमें अपने दिन के प्रति चिंतन करने का मौका मिलता है कि हमारा दिन कैसा व्यतीत हुआ । जो कुछ अच्छा गुज़रा उसे चिन्हांकित करें, उन सकारात्मक विशेषताओं की सराहना करें और उनको आगे बढ़ाऐं । और जो परिस्थितियाँ इतनी आसान नहीं थीं, उनके लिए देखें कि क्या परिवर्तन लाया जाऐ जिससे आगे के लिए सुधार हो ।

कभी कभी, यह देखना भी अच्छा रहता है यहाँ मेरे लिए क्या सबक है? भविष्य में इन परिस्थितयों को न होने देने के लिए अपने जीवन में मैं क्या बदलाव लाऊँ? क्या मैं कुछ कर सकती हूँ? कभी कभी हम कुछ नहीं कर सकते, लेकिन फिर भी हमें बातों को जाने देना है । यह बेहतरीन रहेगा कि पुरानी बातों पर ध्यान नहीं देना, लेकिन यह देखना आवश्यक है कि बातों को कैसे बेहतर और सुचारू बनाऐं ।

इसमें ऊर्जा का सिद्धांत काम करता है, जिसे आकर्षण का सिद्धांत कहते हैं । जहाँ भी हम अपनी ऊर्जा देते हैं तो उसे हम सशक्त करते हैं और उसी विशेषता को और उसी प्रकार के व्यवहार को आकर्षित करते हैं । यह हर बात पर लागू होता है, जो कुछ भी मैं करती हूँ या करना नहीं चाहती हूँ । ऐसा इसलिए है कि यह सिद्धांत चुम्बक की भाँति काम करता है ।

यहाँ इस बात का अहसास करना आवश्यक है कि खुशी मेरे ही हाथों में है । मुझे खुशी देने के लिए मैं किसी व्यक्ति या वस्तु की प्रतिक्षा न करूँ । अभी इसी समय, रूकिए और जो कुछ भी आप कर रहें हैं उसमें खुश रहने का चयन करें । अगर प्रतिक्षा करके आप थक गऐ हैं तो खुशी से प्रतिक्षा करें । अगर आप बहुत मेहनत करते हैं तो खुशी से करें । अगर आप गरीब हैं तो खुशी से गरीब रहिए । जब आप खुश होते हो तो प्रत्येक वस्तु आपके पास आसानी से आ जाती है ।

अब समय हैं… खुशी का चयन करने का । जब आप ऐसा करते हैं तो अपने जीवन के मालिक बन जाते हैं ।

By a Contributing Author

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