जड़ से समाप्त करना

हम सभी स्वतंत्रता चाहते हैं, लेकिन किससे? विकारों के शिकंजे से । चाहे हम अहसास करें या न करें इन विकारों को हम कभी कभी अपने मित्र के रूप में देखते हैं, लेकिन वास्तव में ये हमारे दुश्मन हैं जो हमें दास बना देते हैं ।
राजयोग में हम समझते हैं कि प्रत्येक नकारात्मकता और दुख की जड़ अहंकार, लालच, काम और क्रोध जैसे ‘विकार’ हैं ।
Listen in Hindi…
अगर विकार दुख का बीज है तो इसकी जड़ें, तना, शाखाऐं और डालियाँ विकार और उनके वंशज हैं । एक बीज इतना छोटा होता है और फिर भी इससे कितना कुछ उभर कर निकला है!
हम अपनी खुशी को खो देते हैं क्योंकि हम भय, दुख और नकारात्मक भावनाओं की शाखाओं और डालियों में फँस जाते हैं । हम दुख के पीड़ित बन जाते हैं ।
जब हम विकारों की असली जड़ तक पहुँच जाते हैं तभी हम देख सकते हैं कि वास्तव में हमें कौन सी बात दुख दे रही है ।
दृश्य की कल्पना करें: हर किसी के विकारों का व्यक्तिगत ‘पैकेज’ इस संसार के रंग मंच पर एक दूसरे के विरोध में अभिनय कर रहा है । एक व्यक्ति का क्रोध दूसरे के क्रोध पर आक्रमण करता है, एक व्यक्ति का काम दूसरे के काम के साथ अभिनय निभाता है । मोह तो एक दूसरे के साथ मिलकर सम्बन्धों का बहुत जटिल जाल बन गया है । लालच और प्रतियोगिता हर तरफ से बढ़ते जा रहे हैं । इसमें कोई आश्चर्य नहीं है कि हमने अपने मन की शांति खो दी है!
शांति और खुशी को वापिस पाने के लिए डालियों और शाखाओं के चिन्हों से पीछे जाते हुए हमें तने और जड़ों तब पहुँचना होगा । मालूम करें कि आपका मुख्य मूलभूत विकार कौन सा है और उसे निकालना आरम्भ कर दें । उदाहरण के लिए, अगर आप असंतुष्ट हैं, ज़रूरतमंद और स्वार्थी हैं तो समझ लें कि इन दुखदायी भावनाओंकी जड़ लालच का विकार है । लालच हर पल हमें बताने की कोशिश कर रहा है ‘मुझे चाहिए… मुझे चाहिए…’ और उस खाली पन को भरने के लिए इच्छाओं का जन्म होता है । खालीपन को भरने के लिए व्यर्थ में ही हम चीज़ों को ढूँढते हैं, बल्कि हमें लालच के विकार के बदले प्रेम के गुण और आध्यात्मिक तृप्ति को स्थान देना है ।
हर विकार एक दूसरे से जुड़े हुए हैं और वे एक दूसरे को बढ़ाते हैं । तो मालूम करें कि आपकी भावनाओं और भाव के पीछे कौन से मूलभूत विकार हैं और उन्हें त्याग कर दें या उन्हें समझ और दृढ़ता से परिवर्तन कर दें । बहुत जल्द उनका स्थान शांति, प्रेम और खुशी ले लेंगे ।

यह नक्शा है विकारों के प्रति मेरी समझ का और उनसे कौन से दूसरे विकार पैदा होते हैं । आप देखें कि कौन से बुनियादी विकार से मेरे मन की अवस्था का सम्बन्ध है । फिर उनको परिवर्तन कर दें ताकि उनके अनेक अभिव्यक्तियों का अंत हो जाए ।
यह नक्शा केवल एक उदाहरण है, प्रत्येक व्यक्ति की इनके प्रति समझ भिन्न हो सकती है ।
हम सब में विकार हैं: कोई भी उनसे अछूता नहीं है! लेकिन क्यों न इस सप्ताह समय निकाल कर अपने ‘महान दुश्मनों’ को ढूँढा जाए और देखें उनसे क्या पैदा होता है । आप अपने दुख, उदासी या असंतोष का कारण जान जाऐंगे और आंतरिक शांति और खुशी का मार्ग भी प्रत्यक्ष हो जाएगा ।
अब समय है… खुश… और स्वतंत्र होने का!

© ‘It’s Time…’ by Aruna Ladva, BK Publications London, UK
