व्यर्थ करना व्यर्थ है

सबसे पहले तो यह जानें कि व्यर्थ क्या है? किसी एक के लिए जो व्यर्थ है वह शायद किसी दूसरे के लिए आवश्यक हो सकता है । शब्दकोश में व्यर्थ (कबाड़, कूड़ा, कचरा) को अनावश्यक या अवांछित के रूप में परिभाषित किया गया है । यहाँ मूल शब्द हैं अवांछित और अनावश्यक । तो क्या वास्तव में हर सप्ताह हमें नऐ वस्त्रों की, हर तीसरे वर्ष नई कार की या जितना भोजन हम ग्रहण कर सकते हैं उससे कहीं अधिक फ्रिज में रखने की आवश्यकता है?
यहाँ भयभीत करने वाले कुछ आँकड़े हैं:
- द वर्ल्ड काऊँटस के अनुसार (अभी भी गिनती चल रही है) इस वर्ष विश्व भर में 629,706,632 टन कूड़ा फेंका गया ।
- हर वर्ष विश्व की वार्षिक अन्न की फसल के आधे से भी अधिक जितना अन्न नष्ट और व्यर्थ जाता है ( 2009/10 में 2.3 बिलियन टन)
- द वर्ल्ड काऊँटस के अनुसार (अभी भी गिनती चल रही है) इस वर्ष सारे विश्व में कुल 212,685,503 टन खाद्य सामग्री नष्ट हुई या व्यर्थ गई ।
- यूनाईटिड नेशन के द फूड एन्ड एग्रीकल्चर आर्गनाईज़ेंशन के अनुसार सारे विश्व में 805 मिलियन भूखे लोग हैं ।
ऐसा प्रतीत होता है कि कुछ देशों में व्यर्थ करने को संस्कृति के हिस्से के रूप में स्वीकार कर लिया गया है जबकि दूसरे स्थानों पर पुरानी कारों के पहियें, फसलों के पुराने बोरे और टीन की जंक लगी हुई शीटें वास्तव में लोगों के घरों की छत बनाते हैं । हमारी मानसिकता के साथ गम्भीर रूप से कुछ गलत है ।
व्यर्थ ना केवल स्वीकार्य बन गया है बल्कि ‘आदरणीय’ भी । कुआला लुम्पुर में पिछले साल रमादान के दौरान 270,000 टन भोजन व्यर्थ गया । इतनी मात्रा से 180 मिलियन लोग भोजन कर सकते थे । यह तथ्य इस आध्यात्मिक साधना के उद्देश्य के बिलकुल विपरित है ।
स्पष्ट रूप से 2015 में समुंद्र में व्यर्थ प्लास्टिक के टुकड़ों की संख्या मछलियों की संख्या से अधिक जाना तय थी ।

अगर हम इस बेमतलब के व्यर्थ को रोकना चाहते हैं तो हम सभी को होश में आने की आवश्यकता है… अपनी सोच बदलनी होगी । आज के संसार में व्यर्थ करना एक साधारण कर्म से बढ़कर बन गया है, यह एक मानसिकता बन गई है । अगर हम भोजन व्यर्थ करते हैं तो हम और वस्तुओं को, समय को, सुअवसरों को और अपनी शक्तियों को भी व्यर्थ करते होंगे ।
भोजन व्यर्थ करना बंद करें
अगर हम व्यर्थ नहीं करें तो संसार में पर्याप्त भोजन उपलब्ध होगा । इसको बचाओ और बाँटो । जो भी भोजन हम खाते हैं वह धरती माँ से आता है । इसलिए अगर हम स्रोत का आदर नहीं करते और धरती को कूड़े-कचरे से भरते रहे तो हम जो बोऐंगे वहीं काटेंगे!
जितना आप खा सकते हैं उतना ही लें । अगर आपने अपनी प्लेट में ले लिया है तो इसका अर्थ है कि कोई दूसरा अब वह नहीं ले सकता । भोजन के लिए छोटी प्लेट लें इससे आपको कम भोजन लेने का प्रोत्साहन मिलेगा । आप हमेशा दोबारा भोजन ले सकते हैं लेकिन कम से कम अब आप ऐसा जागृत अवस्था में करेंगे । बहुत बार हमारी आँखे हमारे पेट से बड़ी होती हैं तो यही अच्छा रहेगा कि हम अपने हिस्से पर ध्यान दें! एक सूची बनाऐं और वहीं खरीदें जिसकी आवश्यकता है ।

धन व्यर्थ करना बंद करें
अगर आपके पास बहुत है तो मुझे दे दें मैं अच्छे कार्य के लिए उसका उपयोग करूँगी! धन एक स्रोत है और ऊर्जा है । अपने आप में इसका कोई मोल नहीं है जब तक कि प्रयोग करने वाला इसे कोई मूल्य नहीं देता है । धन महत्वपूर्ण है लेकिन सबकुछ नहीं है । धन जो कुछ भी कर सकता है उसके लिए इसकी सराहना करें और इसका मूल्य रखें, इसका खुशी से प्रयोग करें और ऊर्जा को प्रवाहित होने के लिए कुछ धन दान भी करें । धन व्यर्थ करने का अर्थ है कि हम इसका मूल्य नहीं रखते, और जब हमें आवश्यकता होगी तो यह हमारी सेवा में उपस्थित नहीं होगा ।
समय व्यर्थ करना बंद करें
कम से कम जो धन आपने खर्च कर दिया उसे वापिस कमाया जा सकता है लेकिन जो समय आपने बर्बाद कर दिया वह कभी वापिस नहीं आ सकता! आप फिर से बीस के या चालिस के नहीं होंगे । इसलिए जो करना है वह अभी ही कर लें । और अगर आप उसे नहीं कर सकते तो उसके बारे में सोच कर समय बर्बाद नहीं करें! वह ऐसे ही होगा जैसे आप कार चला रहें हैं लेकिन पीछे की खिड़की से बाहर देखे जा रहे हैं ।
जो कुछ भी करने की आवश्यकता है उसके बारे में सक्रिय हो जाऐं । इसकी प्रतीक्षा नहीं करें कि समय आपको सिखाये । अगर आप करते हैं तो आप कभी समय के मालिक नहीं बन पाऐंगे । सावधानी से अपने समय का प्रबंध करना सीखें । दस के बजाय दो शब्दों का प्रयोग करें और बार बार वही बात नहीं दोहराऐं… सुना आपने, बार बार वही बात नहीं दोहराऐं! अत्यावश्क और महत्वपूर्ण के अंतर को पहचानें और उसी अनुसार अपने समय को समझदारी से प्रयोग करें । दफतर के बाद घर में एक रिपोर्ट पूरी करनी अत्यावश्क है, बच्चों के साथ समय बिताना और अभिभावकों और बच्चों की मीटींग में जाना महत्वपूर्ण है । और आखिरकार अपने लिए समय निकालें! मेरा मानना है कि स्वयं के लिए उपयुक्त ढ़ंग से बिताया गया समय कभी व्यर्थ् नहीं जाता । जब हम स्वयं को भली प्रकार से जान जाते हैं तो जीवन को सम्भाल पाने में हम सुसज्जित होते हैं ।

प्राकृतिक स्रोतों को व्यर्थ करना बंद करें
पानी को व्यर्थ नहीं करें. जिस पल वह नल से नाली में बह जाता है वह व्यर्थ हो जाता है । इसलिए क़िफायत से और समझदारी से प्रयोग करें । बत्ती बंद कर दें और दूसरे उपकरण जो प्रयोग नहीं हो रहे या उनकी आवश्यकता नहीं है उन्हें भी बंद कर दें । इसका ध्यान रखें कि कार की निष्क्रियता से वायु प्रदूषण नहीं करें । वही व्यर्थ करने की मानसिकता यहाँ भी काम कर रही है!
ब्रिटेन ने हाल ही में दूकानों और सुपरमार्केटों में प्लास्टिक के थैलों पर प्रतिबंध लगा दिया है । यह कितना अद्भुत है कि जब लोगों को अपने थैलों के लिए भुगतान करना पड़ता है तो कितनी सावधानी बरतते हैं । बहुत से लोग अपने स्वयं के थैले लाते हैं । लेकिन अपने ग्रह के प्रति सम्मान पूर्ण बनने के लिए हमारे साथ जबरदस्ती क्यूँ की जाये या हमारी खुशामद क्यूँ की जाये? केवल एक ही ग्रह है जिसे हम घर कहते हैं और हमारे स्वार्थ से हम स्वयं के विनाश की ओर ही अग्रसर हैं । तो क्यों न उन में से एक बना जाऐ जो प्रचलन का विरोध कर के विपरित दिशा में जाते हैं!
इससे कोई फर्क नहीं पड़ता कि दूसरे क्या कर रहे हैं, आप अपने विवेक का अनुसरण कर सकते हैं । अंत में आप को ही अपराध बोध या अपराध बोध से मुक्त विवेक के साथ रहना है ।
दीर्घकालिक विकास के लिए विचारशील उपभोक्ता बनें:
कम प्रयोग करें
पुर्नचक्रण करें
दोबारा प्रयोग करें
कूड़ा-खाद बनाऐं
ना कहें (जिस वस्तु की आपको आवश्यकता नहीं है उसे ना कहें)
और अंत में मैं अपना शब्द जोड़ती हूँ – फल भोगें! अपने किये का फल भोगें ।

विचार व्यर्थ करना बंद करें
असल में यह तो इस लेख में सबसे उपर होना चाहिये । क्योंकि उपर लिखे गए सभी व्यर्थ हमारे व्यर्थ विचारों से ही आरम्भ होते हैं! पूरे दिने में हम कितने विचारों को व्यर्थ करते हैं? कुछ का अनुमान है कि हम प्रति दिन 60,000 विचार उत्पन्न करते हैं और उस में से कितनों को हम अपने जीवन में लागू करते हैं? लिहाजा, 59,990 के आस पास व्यर्थ ही होंगे, नहीं?
परेशानी, डर और अतीत के बारे में सोच कर और खोये हुऐ सुअवसरों के बारे में सोचकर अपना समय बर्बाद नहीं करें । आप के पास सोचने के लिए ‘अब’ और ‘भविष्य’ है और इसका भरपूर लाभ उठाऐं । उस पर पूरा एकाग्रचित रहें! अपनी सोच के बारे में रचनात्मक बनें सीमीत नहीं । हम में से अधिकतर सकारात्मक रहते हैं । जब हम सकारात्मक रहते हैं तो हम कम विचार उत्पन्न करते हैं, जब हम नकारात्मक होते हैं तो हमारा मन अत्याधिक सक्रिय होता है!
कर्मों को समझना
कर्म हमें सिखातें हैं कि जो कुछ भी हम करते हैं उसके हम जिम्मेवार हैं । जो कुछ भी हम व्यर्थ करते हैं वह हमारे खाते में आ जाता है । अगर हम कुछ भी व्यर्थ करते हैं तो आवश्यकता के समय वह वस्तु हमें नहीं मिलेगी । अगर आप चकित हैं कि आपके पास समय, धन या अन्य स्रोत क्यों नहीं हैं तो दोबार जाँच करें – जो कुछ भी अतीत में आपने व्यर्थ किया है उसका आप फल भुगत रहे हैं ।
इसके बजाय समय, विचारों, धन या अन्य स्रोतों को व्यर्थ नहीं करें, फिर जिस भी वस्तु की आपको आवश्यकता होगी वह सही समय पर आपके पास आ जायेगी ।
अब समय है… कुछ व्यर्थ नहीं करने का कुछ भी नहीं चाहने का!
Listen to the English of ‘To Waste is Waste’ (Music by Deuter – Distant Dreams)
© ‘It’s Time…’ by Aruna Ladva, BK Publications London, UK
