स्वतंत्र इच्छा, चुनाव और परिणाम – Free Will, Choice and Consequence (in Hindi)

स्वतंत्र इच्छा, चुनाव और परिणाम

 

 

 

आज के समय में प्रकृति अपना आधिपत्त्य साबित कर रही है । हम प्रकृति की झूँझलाहट को देख रहे हैं । हम उस भयंकर ताकत को देख रहें हैं, हमें लगा था कि अपनी तकनीकी और विज्ञान के शस्त्रागार से हम उसे नियंत्रित कर सकते हैं । लेकिन मानवजाति को यह तथ्य समझना होगा कि प्रकृति के साथ हम लड़ाई हार गये हैं, और वह जीत गई है!
परिणामस्वरूप प्रकृति ने हमें अपने घरों में कैद कर दिया है, जैसे एक भयभीत माँ की तरह जो अपने बच्चों को अपने कर्मों पर विचार करने के लिए कुछ समय के लिए एक कोने में भेज देती है । सारा संसार नज़रबंदी में है!!
क्या यह सजा़ है? नही… बिल्कुल नहीं । सजा़ शब्द बहुत भारी है और बोझिल है, और हमें यह अहसास कराता है कि हमने कुछ गलत किया है या हम पापी हैं…। हम कोई इरादतन पापी नहीं हैं… हम में से अधिकतर भोले-भाले हैं, और हम में से अधिकतर कोई सचेत होकर पाप करने वाले नहीं हैं, लेकिन हम बहुत नासमझ बन गए हैं । हम बस खो गऐ हैं । जब हम खो जाते हैं तो हम वर्जित क्षेत्र में कदम रख देते हैं, इससे हम पापी नहीं बन जाते, इससे हम अन्जान, अशिक्षित, अचैतन्य और सुप्त बन जाते हैं । हमारी लापरवाही में और प्रकृति के साथ अनौपचारिक सम्बन्ध के कारण हमने जीवन की बहुत सी चीज़ों के मूल्य के नहीं जाना है ।
बहुत से आध्यात्मिक और भौतिक नियम तोड़े गए हैं । उपभोग्तावाद के कारण हमने ग्रह को लूट लिया है!! हमने ग्रह को प्रदूषित कर दिया, तो इसलिए हमें जुर्माना भरना पड़ेगा जो कि हम अभी भर रहे हैं । जिस प्रकार “प्रवेश निषेध है” होने पर भी हम उल्ल्घंन कर देते हैं तो हमें जुर्माना देना पड़ता है । हम उस समय निरपराधी होने की याचना नहीं कर सकते और चाहे सबकुछ अन्जाने में किया हो तो भी छूट नहीं सकते । जुर्माना है हमारे विशेषाधिकार को हमसे छीन लिया गया है क्योंकि हम बाहर नहीं जा सकते और स्वतंत्रता से प्रकृति की सुंदरता और वैभव का ‘आनंद’ नहीं ले सकते । यह सजा नहीं है; यह हमारे कर्मों का परिणाम है ।
इन दोनों के बीच में अंतर समझना बहुत महत्वपूर्ण है । सजा का अर्थ है कोई दूसर हमें सजा दे रहा है; हमारे लिय निर्णय लिया जा रहा है और हमें दंड दिया जाएगा और हम सजा भुगतेंगे । वह मामला नहीं है । जो कुछ भी हमने उत्पन्न किया है उस सबके लिए हम ज़िम्मेवार हैं, व्यक्तिगत रूप से भी और सामूहिक रूप से भी । तो, जब हम परिवर्तन होंगे तो हम ही हैं जो परिणाम को निर्धारित करेंगे ।

 

हमारे उत्साहित और जोशीले मन नऐ अविष्कार करते हैं और विश्वास से परे के खिलौने बनाते हैं । हम लोगों को अपना नेता चुन कर उनके हाथों में शक्ति देते हैं । हम उनको हमारी सेहत और अर्थव्यव्स्था के बारे में निर्णय लेने देते हैं, और हम उन्हें हमारे जीवन का संचालन करने का अधिकार दे देते हैं । जब हम यूटयूब और टीवी या किसी दूसरे माध्यम से कुछ खास कार्यक्रम देखते हैं, तो हम अपने कर्मों से उन्हें ‘प्रसिद्धि’ और ‘सहमती’ देते हैं, इस प्रकार उसी बात की और आपूर्ति करते हैं ।
फिर हमें इस बात पर अचम्भा लगता है कि आजकल बच्चे बड़ों की बात क्यों नहीं सुनते । जब हम इन माध्यमों को हमारे बच्चों के मनों में मिलावट करता हुआ और किशोरों को नये नये विचार देता हुआ देखते हैं तो हम भूल जाते हैं कि हम ही इसका कारण हैं । हमने ही इस हलात को उत्पन्न किया है । तो दूसरे शब्दों में, जो कुछ भी संसार में हो रहा है वह हमारी ही रचना है । जो हमने बोया वही हम काटेंगे । हमें कीचड़ में खेलना था और इसलिए अभी हम गंदे हो गये हैं, हमने आग से खेला तो हम जल गये । यह बहुत सीधी बात है, तो हमें इतने हैरान क्यों हैं? जो कुछ भी हो रहा है वह हमारे कर्मों का परिणाम है, सजा नहीं ।
आज संसार में बहुत भय है । लेकिन उस भय का निर्माण किसने किया है? चलिए इसे स्वीकार करते हैं… जिस किसी भी चीज़ को हम अपने ध्यान की ऊर्जा देते हैं उसे हम जीवन दे देते हैं । वास्तव में, भय बढ़ेगा अगर हम भय के विचारों में जीते रहेंगे । अगर हमने भय को अपने मन में जगह करने दी तो यह हमारे हृदय के प्रेम और करूणा को विकृत कर देगा ।
असल में हम क्या हैं? हम प्रकाश के कार्यकर्ता हैं । हम प्रकाश के कार्यकर्ताओं को क्या करना है? हमे अपने पवित्र स्नेही प्रकाश के स्वरूप की स्मृति में फिर से स्थित होना होकर अपने प्रकाश को बढ़ाना है ।

 

 

प्रकाश क्या है?
प्रेम प्रकाश है ।
शांति प्रकाश है ।
दया प्रकाश है ।
उदारता प्रकाश है ।
करूणा प्रकाश है ।
प्रत्येक गुण और हर प्रकार की अच्छाई प्रकाश है ।
चलिए प्रकाश के साथ, प्रकाश से और प्रकाश ‘बनकर’ कार्य करें ।
अंधेरी शक्तियों का अस्त्त्वि प्रकाश में नहीं हो सकता क्योंकि वे सच्चाई से डरती हैं, उन्हें प्रकाश के द्वारा उघड़ जाने का भय है । और सभी में सबसे महान प्रकाश कौन सा है? परमात्मा परम प्रकाश है । हमे हल्केपन से… इस संसार में अपने प्रकम्प्न्नों को ऊँचा उठाना है । अंधेरी शक्तियाँ और अधिक अंधेरा उत्पन्न करने की कोशिश करेंगी । लेकिन अंधेरे में क्या होता ह? अंधेरा हमें उलझन में डाल देता है । अंधेरे में हम सही से देख नहीं पाते, हम धक्के खाते हैं और भयभीत हो जाते हैं । प्रकाश में, हम सबकुछ स्पष्टता से देख पाते हैं और आत्मविश्वास से सच्चाई की ओर अग्रसर होते हैं ।
हमें स्वयं को याद दिलाते रहना है कि सबसे पवित्र और सबसे शक्तिशाली प्रकाश ईश्वर का प्रकाश है । वह दिव्य प्रकाश सदा ही चमकता है और कभी भी प्रदूषित नहीं होता । इसलिए भगवान को पतित पावन के रूप में याद किया जाता है । परमात्मा की चमक कभी फीकी नहीं होती । ईश्चर ही सर्वश्रेष्ठ सुरक्षा की छत्रछाया है । चलिए स्वयं को उनके प्रकाश की किरणों के तले और उस दिव्य सत्ता के प्रेम में देखें ।
अंत में, हम याद रखें ‘स्वतंत्र इच्छा’ का अपना महत्वपूर्ण रोल है । जो कुछ भी रोल हम निभाना चाहते हैं वह हम इच्छा से चुन रहे हैं । हम सबकी स्वतंत्र इच्छा है चुनने की । यह हमारे हाथ में है । इसे हमें किसी दूसरे द्वारा प्रदान करने की आवश्यकता नहीं है । हम स्वयं के विचारों, शब्दों और कर्मों से चुन रहे हैं । भली प्रकार चुनें । आत्मा के भीतर की शक्ति को पहचानें । सभी मिल कर जब हम प्रकाश की राह चुनते हैं, तो हम संसार को प्रकाशित करते हैं, प्रत्येक अपने अपने प्रकाश से ।
हम समझते हैं कि आकर्षण का सिद्धांत कैसे कार्य करता है । जिस पर भी हम अपना ध्यान लगाते हैं उसे हम शक्ति देते हैं । इसलिए इस बात को लेकर हमें बहुत सावधान रहना चाहिए कि हम अपने मन में किस बात का चिंतन करते हैं । भय के प्रकम्पन्न बहुत कमज़ोर होते हैं, यह हमें शिथिल कर देता है । जिस भी बात के बारे में सोचते हैं तो वही बात और अधिक आकर्षित करते हैं । हमें अपने मन को लेकर बहुत चौकन्ना रहना है और अपने प्रकम्पन्न बहुत ऊँचे रखने हैं और अपने मन को प्रकाश में रखना है । हम सब जानते हैं कि जब हम ऐसा नहीं करते तो क्या होता है, उसका परिणाम हम आज देख रहे हैं ।
हमें स्नेही और उदारदिल भी फिर से बनना है जो कि हमारे स्वभाव का हिस्सा है । हमें स्व के और दूसरों के सुख और भलाई के बारे में ध्यान रखना आरम्भ करना है । हमें ध्यान देना होगा कि यह ‘सोशल डिस्टंसिंग’ और अलगाववाद हमें विचेतन न कर दे, और हमारे मानवता के आम बंधन को हमसे छीन न ले क्योंकि हम सभी रूहानी रूप से जुड़े हुए हैं और हम सब एक हैं ।

अब समय है… स्वतंत्र इच्छा और चुनाव का अभ्यास करने का और शक्ति को फिर से अपने हाथ में वापिस ले लेने का । प्रकृति की शक्ति को, प्रेम, आभार और सम्मान के साथ पहचानना, और प्रकाश और प्रेम की ओर लौटना ।

 

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One Response to “स्वतंत्र इच्छा, चुनाव और परिणाम – Free Will, Choice and Consequence (in Hindi)”

  • B.K.Urmila

    Very NIce Artical Hame Apne vicharo ko prakashmay banana hai,

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