सत्यता, सम्पूर्ण सत्यता, और कुछ नहीं केवल सत्यता (Truth, the Whole Truth, and Nothing but the Truth in Hindi)

सत्यता, सम्पूर्ण सत्यता, और कुछ नहीं केवल सत्यता

Sharp focus on golden "TRUTH" in front of a row of plain, gray "LIES" blurring and receding into the distance.  Isolated on white.

 

कहा जाता है कि अज्ञानता परमानंद है… या क्या है? कितने समय तक हम अनभिज्ञ या आत्मदमन में रह सकते हैं? अगर हम सच्चाई का सामना करने के अनिच्छुक हैं तो इसका अर्थ है कि हम असत्यता को अपने जीवन जीने के तरीके के रूप में स्वीकार कर रहे हैं । कुछ सत्य जैसे चोरी, दूसरों को दुख देना प्रत्यक्ष हैं और इन्हें किसी व्याख्या की आवश्यकता नहीं है । दूसरे सत्यों को अनुभवों, चिन्तन और मेडिटेशन के आधार पर महसूस किया जा सकता है । और एक बार हमें महसूसता हो गई तो हम फिर से ‘ना जानने’ की और नहीं जा सकते और हम फिर से असत्यता को स्वीकार नहीं कर सकते!

जब आप सत्य को देखते और सुनते हो तो आप उसका खंडन नहीं कर सकते । जब आपने किसी बात की सत्यता को जान लिया है तो फिर असहमति की कोई गुंजाईश नहीं रहती । हाँ, वास्तव में सत्यता को महसूस करने, सुनने और जानने के लिए हमें अपने सभी फिल्टरों, बाधाओं, अहंकार और मोह से परे जाना होगा ।

Honesty, Integrity, Believable, Trustworthy, Truth and Sincerity 3d words around a door to illustrate respectable character and good reputation

सत्यता को अक्सर ज्ञान के साथ उलट-पलट कर दिया जाता है । एक बार आपने कुछ सीख लिया तो फिर आप कभी उसे भुल नहीं सकते । फिर आप यह नहीं कह सकते कि ‘मुझे मालूम नहीं है ।’ एक बार आपने जान लिया तो बस जान लिया! और वह ज्ञान सदा के लिए आत्मा में रह जाता है । आप कुछ समय के लिए भूल सकते हैं लेकिन इसका अर्थ यह नहीं कि वह हमेशा के लिए चला गया, इसके लिए ही तो हम कहते हैं कि ‘मुझे याद नहीं आ रहा ।’ इसका अर्थ है कि आप जानते हैं कि आप कभी जानते थे, लेकिन… ! सत्यता के अनुभव के लिए भी यही बात है, एक बार किसी बात के बारे में आप सत्यता को जानते हैं तो आप वापस झूठ का जीवन नहीं व्यतीत कर सकते । आप सत्यता को अनदेखा करने का कितना भी प्रयास करें, या अपने आपको इससे नकार दें लेकिन इससे केवल आप स्वयं को दुख दे रहे हैं और अपनी प्रसन्नता में विलम्ब कर रहे हैं ।

स्वस्थ जीवन जीने का ही उदाहरण ले लें । हम सब जानते हैं कि हमें स्वस्थजनक भोजन करना चाहिए और प्रतिदिन व्यायाम करना चाहिए । यह एक आम ज्ञान की बात है । फिर भी हम तैलिय, मसालेदार और चीनी से बने भोजन ग्रहण करते रहते हैं और निष्क्रिय और गतिहीन जीवन व्यतीत करते हैं । तो हम किसको बेवकूफ़ बना रहे हैं? सिर्फ अपने आप को ।

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सत्यता शाश्वत और अविनाशी है । यह कभी बदलती नहीं । सत्यता ऐसे नहीं कि आज कुछ है और दूसरे दिन कुछ और हो जाऐगी । यह स्थायी रहती है । जो स्थायी है वही सत्य है । उदाहरण के लिए, एक वृक्ष ऋतुओं अनुसार बदलता है लेकिन रहता वृक्ष ही है ।

जब हम सच्चे और ईमानदार होते हैं तो हमें कुछ छिपाने की आवश्यकता नहीं है । किसी झूठ के प्रत्यक्ष होने का हमें कोई डर या चिंता नहीं रहती । हम निश्विंत रहते हैं । हमारे कर्मों की स्लेट साफ रहती है । हमारा चित्त साफ है । इसी कारण हम निरंतर खुश रहते हैं । अगर कोई गुप्त भेद छिपा रखा है तो वह बार बार हमारे अंत:करण को खींचेगा और हम हल्के और खुश नहीं रह पाऐंगे ।

जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में हम धोखा और भ्रष्टाचार देखते हैं, फल खरीदने से लेकर जो कि नीचे सड़े हुए रखे रहते हैं, कपटपूर्ण बीमा कम्पनियाँ… बेईमानी से दूर होना मुश्किल सा लगता है । कुछ लोगों के लिए डॉलर भगवान बन गया है और हर कोई लाखों कमाना चाहते हैं चाहे उसके लिए उसे अपना गौरव और सत्यनिष्ठा को क्यूँ नहीं गँवाना पड़े । सत्यता का स्थान पीछे चला गया है ।

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यह कितना ही साधारण लगे, हमें सत्यता के महत्व और मूल्य को फिर से समझना होगा! हम भूल गये हैं कि अपनी आत्मा की सत्यता को फिर से सजीव करना और सुलगाना कितना महत्वपूर्ण है । सच्चाई का जीवन जीने से आत्मा को शक्ति मिलती है । हर पल हमारे सामने विकल्प है सच्चाई से जीने का या झूठ में जीने का; गुणों का जीवन जीना या विकारों का जीवन जीना । और जब हम गुणों का अधिक चुनाव करते हैं तो हम और अधिक शक्तिशाली बनते जाते हैं ।

दिखावा बंद करें । इससे किसी का लाभ नहीं हो रहा । मुखौटों को हटा दें । पारदर्शक बनें! आदम और हव्वा की नग्नता केवल भौतिक नहीं थी; यह आत्मा की पूर्णतया पारदर्शिता और सत्यता का प्रतीक है । उनके पास छुपाने को कुछ नहीं था!

अब समय है… आत्मा की सत्यता की और लौटने का । सच्चे बनिये । खुश रहिये ।

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Meditation Commentary in English

 

© ‘It’s Time…’ by Aruna Ladva, BK Publications London, UK

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