र्निव्यसन (De-addict in Hindi)

र्निव्यसन

addiction

 

इन सवालों का जवाब ईमानदारी से दें:

जब आपका फोन आपके पास नहीं होता तो क्या आप असुरक्षित महसूस करते हैं?

फोन की हर ‍पिंग का जवाब आप तुरंत देते है?

क्या आपका शरीर निरंतर अस्वास्थ्यकर खाद्य के लिये तरसता रहता है?

क्या कोई गपशप सुनकर आपके कान खड़े हो जाते हैं?

क्या आज आपने फेसबुक पर 15 मिनट से अधिक व्यतीत किये, या इंटरनेट का प्रयोग किया? (सारा दिन?)

अगर किसी भी या सभी सवालों का उत्तर हां है तो आप व्यसनी हैं । इसे स्वीकार कर लें!

हम एक ऐसे संसार में रहते हैं जहाँ हम सब को किसी न किसी बात की लत पड़ी हुई है । सिर्फ ड्रग्स या सिगरेट का आदी हो जाना ही व्यसन नहीं है, लेकिन कोई भी वह कार्य करने के लिए जब कोई बाध्य हो जाता है जो उनके हृदय की गहराईयों में वह जानता है कि वह स्वास्थ्यकर नहीं है या उसके लिए सही नहीं है । फिर भी, शायद न चाहते हुए भी वे उस कर्म को करते रहते हैं

साधारण से साधारण बात जैसे अपने फोन से चिपके रहना, घंटों फेसबुक पर बिताना, चॉकलेट का आनंद लेना या जब तक बुरी तरह थक न जायें तब तक खरीददारी करते रहना, यह सब बहुत सीधा और र्निदोष प्रतीत होता है । और अगर सचेतन मन से यह करने का निर्णय लिया है तो निस्संदेह यह बिल्कुल ठीक है । ये हमारे जीवन को सुधार सकते हैं और निश्चित रूप से अगर सही तरीके से प्रयोग किया तो तकनीक बहुत लाभदायक है । फिर भी लिटमस परीक्षा है … क्या मैंने य‍ह सब करने का चुनाव किया था? और मुझे कैसा लगेगा अगर यह सब वस्तुऐं मुझसे छीन ली जाऐं?

chained to comp

ड्रग्स के व्यसनी को आप अगर छोड़ने के लिए कहेंगे तो उसे समय लगेगा । किसी को कुछ दिन के लिए अपना फोन प्रयोग करने के लिए मना कर दें तो वह चिल्लायेगा! तो ड्रग्स के एक व्यसनी में और हममें क्या अंतर है? हमें अगले संदेश और फोन कॉल से भी बहुत खुशी मिलती है । बहुत सारी खरीददारी करने से भी स्वर्ग जैसी खुशी का अनुभव होता है! अगर हम अपने फोन पर निर्भर हो गये और उसके बिना कहीं नहीं जाते तो थोड़ा अंतर स्पष्ट दिखाई देता है ।

किसी भी प्रकार की ‘ड्रग्’ हमें हमारे ‘वास्तिवक’ जगत से दूर कुछ मिनटों या घंटों के लिए कदम रखने का अनुभव देती है । हम अपनी समस्याओं और विवादों से कुछ पल के लिये दूर हो जाते हैं और कल्पना या विस्मृति के जगत की ओर मुड़ जाते हैं । हम वर्तमान पल से दूर हो जाते हैं । जब हमारी ‘पसंदीदा ड्रग’ का असर कम होता है तो हमें खालीपन, भावनात्मक जर्जरता, समय बर्बाद करने के कारण स्वयं से नाराज़ या अपराध भावना या शर्मिंदगी की महसूसता होती है ।

समय के साथ साथ जब हम अपने बेहतर निर्णय के खिलाफ,और बिना सुविचारित चुनाव के कुछ करते हैं तो इससे हमारा स्वाभिमान, और अपने जीवन के असली निर्णय लेने की क्षमता कम हो जाती है । हमसे हमारी वर्तमान पल में जीने की क्षमता भी छीन जाती है । और, निस्संदेह, वर्तमान पल ही यहां है ।

व्यसन के इन पदार्थों के लिए तरसने का कारण है कि हमारे भीतर पहले से ही किसी बात की कमी है । सम्बन्ध और सम्पर्क को हम इन्टरनेट के माध्यम से खोजते हैं । अंतरंगता को हम फेसबुक के माध्यम से ढूँढते हैं । आत्मा की भूख को हम खा-पीकर मिटाने का प्रयास करते हैं । फिर भी, भीतर का सुराग केवल भीतर से ही भरा जा सकत है, बाहर से नहीं । अपनी संतुष्टता के लिए हम अनुचित स्थान पर खोज कर रहे हैं ।

Young couple embracing and still using their mobile phones

अगर व्यसनी होकर रहने में ही आप खुश हैं तो ठीक है । बस इस बात का ध्यान रहे कि जब भविष्य में आपकी ‘ड्रग’ उपलब्ध नहीं होगी तो आप कैसा अनुभव करेंगे ।

लेकिन अगर आपको लगता है कि यह समय र्निव्सनी बनने का है तो इसकी कुँजी है अपने जुनून और उद्देश्य को ढूँढना । स्वयं की ओर और अपने जीवन की ओर भली प्रकार देखें । इस बात की खोज करें कि कौन सी बात आपको खुशी प्रदान करती है और निर्णय करें कि आपको वास्तव में क्या करना है । इस बात का अहसास करें कि जितनी शक्ति के साथ आप वर्तमान समय जी रहे हैं उससे अधिक शक्ति आपमें विद्यमान है और उस अनुसार जीने के लिए वचनबद्ध हो जायें । अपना लक्ष्य निर्धारित करें, योजनाऐं बनाऐं, उद्देश्य स्पष्ट करें ।

जब अपना लक्ष्य पाने की आपमें तीव्र इच्छा होगी तब आप अपने समय में से एक मिनट भी व्यर्थ नहीं गवाँऐंगे । जो लोग समय गँवाते हैं उन्हें समय के महत्व का मालूम नहीं होता । जो लोग चलते चलते ‘गुम’ हो जाते हैं वे वहीं हैं जिन्होंने अपना उद्देश्य ढूँढने का प्रयास नहीं किया ।

और एक बार आपको अपना उद्देश्य और जुनून मिल गया तो फिर आप स्वत: ही उस कार्य में अपना समय लगायेंगे जिससे आपको सच्चा संतोष मिले और आपको अपनी लतों पर निर्भर होने की आवश्यकता नहीं होगी । यह जुनून आपको अपराधभाव के बिना ही अच्छा महसूस कराऐगा, और जीवन को भली प्रकार व्यतीत करने की महसूसता होगी । कोई पश्चाताप नहीं होंगे और वापिस जाने की आवश्यकता रहेगी ।

अगर हमें हमारे जीवन में किसी व्यसन की आवश्यकता है तो वह हमारे जीवन को ‘सुधारने’ के लिए हो! अपने अंतर मन को संतुष्ट कर लें और बाकि सब अपने आप ठीक हो जाऐगा ।

अब समय है… आत्मा के छिद्र को भरने का । समय व्यर्थ करने वाले और आत्मा को जर्जर करने वाले क्रियाकलापों से र्निव्यसनी बनने का और उसे जुनून और उद्देश्य से भरने का!

© ‘It’s Time…’ by Aruna Ladva, BK Publications London, UK

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