मुझे भरोसा है… (I Believe in Hindi)

मुझे भरोसा है…

मुझे भरोसा है कि एक बेहतर संसार आ रहा है । और उसके‍ लिए हमें बहुत कड़ी मेहनत करने की आवश्यकता है! हाँ प्रियजनों! बहुत अधिक मेहनत! हम अज्ञानता और विवशता में केवल बैठ कर देख नहीं सकते । जैसे जैसे अनैतिक या काली ताकतें अपनी शक्ति को बढ़ा रही हैं वैसे वैसे हम ‘प्रकाश के कार्यकर्ताओं’ को अपनी शक्तिओं को एकत्र कर आगे बढ़ना होगा ।

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जो गुण हम संसार में खोज रहे हैं उन्हें अपने जीवन में शामिल करने के लिए हमें अपनी बेहतरीन कोशिश करनी होगी । अगर हम शांति चाहते हैं तो हमें शांति से जीना होगा । अगर हम ईमानदारी या विश्वसनीयता चाहते हैं तो हमें इनका अभ्यास करना होगा । अपने जीवन में सच्चाई और सत्यनिष्ठा के साथ आगे बढ़ते रहना होगा, अपनी कमियों से हार नहीं खानी या झगड़ों या घृणा में नहीं फँसना । यही वे ऊर्जाऐं हैं जिससे अनैतिक ताकतें अपनी शक्ति बटोरती हैं । हमें उस राक्षस को भूखा मारना है!

 

मुझे भरोसा है कि भगवान है । परमात्मा के होने या ना होने के बारे में बहुत से विचारों के होते हुए भी मुझे भरोसा है उसके अस्तित्व पर और आवश्यकता के समय वह सदा ही मेरे लिए उपलब्ध है । जो कुछ भी संसार में गलत हो रहा है उसके लिए परमात्मा को दोषी ठहराना बहुत आसान है । लेकिन क्या आप वास्तव में ऐसा सोचते हैं कि हमारा पिता होते हुए वह हमें दुख पहुँचाएगा या हमें खुशी और उसके प्रेम से वंचित रखेगा? दोबारा विचार करें । अगर हम उस पर दोष मढ़ना चाहते हैं तो इसलिए क्योंकि दोष लगाने के लिए हमें कोई चाहिए क्योंकि हम व्यक्तिगत रूप से या सामूहिक रूप से अपने कर्मों की जिम्मेवारी उठाना नहीं चाहते । और जब कुछ गलत हो रहा होता है तो हम चाहते हैं कि भगवान रक्षक के रूप में आऐ और हमारी सभी समस्याओं को हल कर दे, बिल्कुल हमारे जीवन में आजकल के यंत्रों की तरह, बस एक बटन दबाओ और जो चाहे सो पाओ । मुझे लगता है वह चाहता है कि हम अपने पैरों पर खड़े हो जाऐं और वह बन जाऐं जो वास्तव में हम हैं ।

मुझे भरोसा है कि हम सब में अंतर्निहित अच्छाई है । कभी कभी किसी अपराधी में यह देखना मुश्किल हो जाता है, लेकिन समय को थोड़ा पीछे घुमाते हैं जब वह अपराधी नहीं था । क्या वह ऐसे पैदा हुआ था? बिल्कुल नहीं । हरेक अपराधी में एक महात्मा होता है; तो हम उस साधुता को देखें । प्रत्येक आत्मा मूलभूत रूप से और स्वाभाविक रूप से गुणवान है । हम इस बात को जानते हैं क्योंकि आमतौर पर हम खुशी, ईमानदारी, दयालुता, प्रेम, शांति आदि की ओर खींचे चले जाते हैं । तो हम हमारे सामने मौजूद मूलभूत आत्मा को देखें और उस मनुष्य पर अपना ध्यान केंद्रित न करें जो रास्ते से भटक गया है । ऐसा करने से हो सकता है हम उस आत्मा को उसके मूलभूत सत्य स्वरूप की स्मृति दिला दें ।

मुझे भरोसा है कि हम सबमें बदलाव लानें की क्षमता है । बहुत से ऐसे लोग हैं जो बहुत जल्दी हार मान लेते हैं । या वे यह सोचते हैं कि सकारात्मक बदलाव केवल अमीर, मशहूर या शक्तिशाली के द्वारा ही लाया जा सकता है । लेकिन, एक बार जब हम आत्मा की सुषुप्त क्षमताओं के बारे में जागरूक हो जाते हैं तो हम महसूस करते हैं कि हम चमत्कार करने में समर्थ हैं । अपने चारों ओर देखें, हरेक वस्तु के अस्तित्व का एक अर्थ है । किसी भी वस्तु का केवल अपने लिए अस्तित्व नहीं है । पेड़, नदियाँ, पौधे – हरेक का एक उद्देश्य है । इसी प्रकार जब हम उस उद्देश्य को जान लेते हैं कि हम यहाँ क्यों हैं और क्या करने आऐ हैं, तब हम अपने जीवन को और संसार को परिवर्तन कर सकते हैं । इसके लिए, हमें जागरूक, सचेत और चौकस होना होगा ।

मुझे समूह की शक्ति पर भरोसा है । अगर हम कुछ लोगों की चेतना जागरूक कर दें तो हम संसार में लहरें पैदा कर सकते हैं । जैसे की सौवें बंदर की कहानी में हुआ, जब अधिक से अधिक लोग जागरूक होंगे, स्पंदन आवृति अपने सिरे पर पहुँच जाऐगा फिर संसार आसानी से परिवर्तन हो जाऐगा! यात्रा में जैसे हम बुरी संगत में बुरा करने से स्वयं को नहीं रोक पाते, चाहे हमने कितना भी ना करने का निर्णय लिया हो, इसी प्रकार जब हम बहुत ऊँची ऊर्जा में होते हैं तो दूसरे भी उनकी मूलभूत सत्यता के करीब पहुँच जाते हैं, सकारात्मक स्वभाव धारण होने लगता है और उन ऊँचे प्रकम्पन्नों के प्रभाव से उनका उत्थान हो जाता है ।

मुझे भरोसा है कि भीतर से हम सब सत्यता को जानते हैं कि हम कौन हैं । हमें बस स्वयं के साथ कुछ समय बिताने की आवश्यकता है और अपने सत्य स्वरूप को जानते हैं । हमें सशक्त और स्वनिर्भर बनने की आवश्यकता है । फिर हम संसार में अपना प्रकाश फैला सकेंगे ।

अब समय है… भरोसा करने का …

 

 

 

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