भोजन शानदार भोजन -Food Glorious Food (in Hindi)

भोजन शानदार भोजन

भोजन हमारे जीवन का महत्वपूर्ण भाग है, और भोजन का समय अति महत्वपूर्ण है । लेकिन, लेकिन हमें अपने भोजन की और इस समय की, जो हम अपने शरीर को ईंधन से भरने में लगाते हैं, हमें कितनी अहमियत है? बिना भोजन और जल के हम समाप्त हो जाऐंगे । क्या हमें इस बात का अहसास है कि भोजन हमारे शरीर और आत्मा दोनों को पोषण करता है? हम में से कितने इस बात को मानते हैं कि शरीर को भोजन खिलाना वास्तव में एक पावन कर्म है । क्योंकि शरीर के सहयोग के बिना वस्तुत: हम कुछ नहीं कर सकेंगे ।

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फिर भी, कितनी बार हम रूक कर समय निकाल कर अपने भोजन की सराहना करते हैं, और इस प्रक्रिया का आदर करते हैं जिससे हमें पोषण मिलता है । भोजन खाते समय जब हम जल्दी में होते हैं और तनाव में होते हैं, तो हम भोजन को सही प्रकार से कैसे पचा सकते हैं? भोजन ग्रहण करने की प्रक्रिया से जो प्राकृतिक पोषण मिलना चाहिए क्या हम वास्तव में उसे अनुभव कर पा रहे हैं? और हम में से कितनों की चलते-फिरते चबाने की आदत है?

अगर सच कहा जाऐ तो हम में से बहुत कम लोग भोजन करते समय ‘वर्तमान समय’ में उपस्थित होते हैं । प्रकृति की दानशीलता का भरपूर लाभ लेने के लिए, ना केवल हम क्या खा रहे हैं, भोजन कैसे पका रहे हैं, बल्कि किस मनोवस्था से भोजन ग्रहण कर रहे हैं, इस बारे में‘सचेत’ रहना बहुत महत्वपूर्ण है ।

आजकल के भोजन में ऊर्जा बहुत कम है! जो वस्तु बहुत ताज़ी और जैविक दिखाई दे रही है और इस बात का दावा कर रही है कि उसके ऊपर और भीतर कहीं रसायनिक पदार्थ नहीं हैं, फिर भी इसका अर्थ यह नहीं कि यह पूरी तरह से भरपूर और ऊर्जायुक्त है ।

भोजन हमारे तन को शक्ति से नहीं भरता । ऐसा क्यों है? क्योंकि समयानुसार त्तवों के सभी रूप जर्जर हालत में पहुँच चुके हैं: वायु, जल, पृथ्वी, धातुऐं, प्रकृति के सभी प्राकृतिक तत्व अपनी असली योजनानुसार सहयोग नहीं देते हैं । मूलत:, अगर मिट्टी में कोई खनिज पदार्थ और विटामिन नहीं बचें तो, जो पौधे मिट्टी में उगाये जा रहे हैं उनमें मिट्टी के गुण कैसे आऐंगे?

और इन सबमें लालच की ऊर्जा को और मिला दें । क्योंकि उत्पादक और विक्रेता धरती का अधिक से अधिक प्रयोग करके अपनी पैदावार को अधिकतम करने का प्रयास करते हैं । धरती को फिर से उपजाऊ और संतुलित बनाने के लिए खाली नहीं छोड़ा जाता । यह सोच कि सब कुछ हमारे लेने के लिए ही है, अंत में हमारे पतन का कारण बनेगी । ले लो… ले लो… और थोड़ा और ले लो, लालच से प्रेरित इस प्रकार के रवैये का अर्थ है कि अंत में इस सुंदर ग्रह, जिस पर हम सभी को रहना है, की सही देखभाल न करने के लिए भारी कीमत चुकानी पड़ेगी । इस बात का अहसास हमें कब होगा कि हमें धरती माँ को कुछ वापिस देना भी आरम्भ करना है?

कुछ लोगों को इस बारे में जागृति आई है और कुछ समय तक ऐसा किया भी है । यही कारण है कि कुछ लोग जागरूक अवस्था में शाकाहारी या वीगन बनने का निर्णय करते हैं । अधिक लोग सचेत और नैतिक खरीददार हैं, जो उचित व्यापार को सहयोग देते हैं, या स्थानीय किसानों और छोटे कारोबारीयों को । बहुत बड़ी संख्या में लोग बड़े चेहराविहीन संस्थाओं, जिन संस्थाओं को केवल धन में ही रूची है, से मुँह मोड़ने लगे हैं । इन बड़ी संस्थाओं को इनके कार्याकलापों का वातावरण पर क्या प्रभाव पड़ता है उससे कोई सरोकार नहीं है ।

ऊर्जा, प्रकम्पन्नों और आवृतियों का हमारे संसार पर प्रभाव पड़ता है । सिर्फ जो हम करते हैं वही महत्वपूर्ण नहीं है, लेकिन हम क्या सोचते हैं और कैसा महसूस करते हैं वह भी महत्वपूर्ण है । भोजन को छोड़ो लेकिन हमारे विचार और भावनाऐं कितनी स्वस्थ हैं? इसलिए, जो भोजन हम ग्रहण करते हैं और जो भी कर्म हम करते हैं उनसे भी उसी प्रकार की ऊर्जा प्रतिबिम्बित होगी ।

जैसा कि प्रौफेसर ईमोटो ने हमें यह सिद्ध कर के बताया है कि सकारात्मक ऊर्जा देकर हम अपने भोजन का आणविक आकार भी बदल सकते हैं । डा. ईमोटो के शोध ने हमें दिखाया कि जब पानी को नकारात्मक या सकारात्मक ऊर्जा के सम्पर्क में लाया गया तो जो ऊर्जा उसमें प्रवाहित हुई उसने पानी के आणविक आकार को प्रचण्ड रूप से परिवर्तित कर दिया । जिस पानी को सकारात्क टिप्पणी और प्रकम्पन्न मिले उसने पूर्णतया समप्रमाण क्रिस्टलों का निर्माण किया, बिलकुल हिमकणों की भाँति । दूसरी ओर, जिस पानी को नकारात्मक प्रकम्पन्न मिले थे वह भी परिवर्तित हुआ और टूटे हुए आकारों का निर्माण किया ।

अपने पौधों को उत्तम ढंग से उगाने के लिए उनसे बातें करने के मामले में प्रिंस चार्लस बहुत प्रसिद्ध हुऐ थे और उनका मज़ाक भी बनाया गया था । पौधे, जो कि हमारा भोजन बनते हैं, अच्छी ऊर्जा और खुशी के प्रकम्पन्नों के प्रति, अधिक पोषक और स्वास्थ्यवर्धक भोजन का उत्पाद करके बहुत अच्छी प्रतिक्रिया करते हैं, आप सोचो कि इस प्रकार के भोजन का हमारी सम्पूर्ण सेहत पर कैसा असर पड़ेगा । ‘हर्षित’ भोजन खाने वाले हम भी ‘हर्षित’ बन जाऐंगे!

इसलिए भोजन ग्रहण करने से पहले भोजन के प्रति आदरयुक्त शांति, प्रार्थना और धन्यवाद का भाव आवश्यक है । जब हम भोजन के सामने बैठते हैं तो उसकी ओर प्रेम से देखें और जो भोजन हमारे पास है उसके लिए धन्यवाद करें, हम भोजन को वह आदर दे रहे हैं जिसका वह हकदार है । भोजन ए‍क तत्व है और सभी तत्व प्रेम के प्रति उत्तम प्रतिक्रिया देते हैं । यह हमारी सेवा भली प्रकार करेगा ।

जब हम भोजन के प्रति धन्यवाद का भाव रखते हैं तो हम महसूस करते हैं कि जो लोग बुरे हालातो में रहते हैं उनके लिए प्रतिदिन आराम से खाने का यह साधारण कर्म भी एक संघर्ष है । असल में, कुछ हालातों में तो जीने और मरने का हाल हो जाता है । हमें य‍ह अहसास करना आवश्यक है कि “मैं और मेरे” के अलावा मैं एक बड़े संसार का हिस्सा हूँ और जो कुछ भी हम करते हैं उसका प्रभाव दूसरों के जीवन पर पड़ता है, और ख़ासतौर से प्रकृति पर ।

अब समय है… जाँचने का: जो भोजन हमारी प्लेट में है उसके प्रति हम कितने कृतज्ञ हैं? याद है कैसे दादी माँ आवश्यकताऐं पूरी करती थी और कहती थी: “व्यर्थ नहीं करो । इच्छा मत करो” । क्यों न अपने आधुनिक जगत में हम दादी माँ की किताब से एक पन्ना ले लें?

 

© ‘It’s Time…’ by Aruna Ladva, BK Publications London, UK

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3 Responses to “भोजन शानदार भोजन -Food Glorious Food (in Hindi)”

  • harpal singh

    Thank you Sister for the wonderful article, very practical and useful,regards

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  • harpal singh

    Om shanti Divine Sister, very nice article , really an eye opener to the truth and provides the remedies ,as to what we can do, regards

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