प्रेम की नई शैली का निर्माण – Creating a New Meme of Love (in Hindi)

प्रेम की नई शैली का निर्माण

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“शिक्षा सबसे शक्तिशाली हथियार है जिसे आप संसार को बदलने में प्रयोग कर सकते हैं” – नैल्‍सन मन्‍डेला

कहा जाता है कि किसी भी आदत के निर्माण में 21 दिन लगते हैं । और हम कितने दिनों से अपने घरों में बंद हैं ? हम में से कुछ न केवल लॉकडाउन हुए हैं बल्कि हम आमतौर पर जहॉं हम रहते हैं उससे कहीं दूर अटक गए हैं । तो कौन सी नई आदतें हमने जागृत अवस्‍था में बनाई हैं ? और क्‍या हम उनसे खुश हैं ?
शैलीयॉं सूक्ष्‍म होती हैं और विचारों, सिद्धांतों और विश्‍वास से चुपके से हमारे प्रतिदिन के जीवन में और संस्‍कृति में जगह बना लेते हैं, पहले बिल्‍कुल अदृश्‍य और अब हमारे जीवन के ‘सामान्‍य’ हिस्‍से के रूप में हम उन्हें स्‍वीकार कर लेते हैं । हमें इन शैलीयों या मीम्‍स के भाव को परखना होगा कि क्‍या वे हमारे लिए वास्‍तव में अच्‍छे हैं? उदाहरण के लिए हमारे बच्‍चों को, पोत्रे पोत्रियों को और दादा दादी को या किसी मित्र को गले लगाने में डर लगना कितना ‘सामान्‍य’ है? कितने समय तक हम हाथ मिलाने से, चुमने से या किसी की पीठ थपथपाने के लिए डरते रहेंगे? क्‍या भविष्‍य में हम अपना जीवन ऐसे जीना चाहते है? हमें इस प्रकार के भय की संस्‍कृति का विरोध करना चाहिए । तो यह समय है जागृत होने का, क्‍योंकि जो भविष्‍य भय से भरा है वह रहने के लिए सुखदायक नहीं होगा ।

‘आपका काम प्रेम को ढूँढना नहीं है, लेकिन आपका काम है प्रेम के खिलाफ जो रूकावटें हमने बना ली हैं उनको ढूँढना’ रूमी

चलिए वास्‍तिवकता की जॉंच करें और थोडा समय निकाल कर जॉंच करें कि हम कौन से शब्‍दों का प्रयोग कर रहे हैं और कौन सी वृत्ति का निर्माण कर रहे हैं । भावनात्‍मक ट्रिगर पर होने वाली स्‍वाभाविक बिना सोचे होने वाली प्रतिक्रियाओं को चैक करें । हम कैसा अनुभव करते हैं जब हम ये शब्‍द सुनते हैं… वायरस, सोशल डिसटेन्‍सींग, सेल्‍फ आइसोलेशन, मास्‍क और चीन? ये सभी शब्‍द हमारे जीवन में चुपके से घुस आऐ हैं और अब हमारे मनों और हृदयों को अपने अनुसार ढाल रहे हैं । कल मैंने एक बहुत सुंदर शीर्षक देखा जो कि इस प्रकार था : “सोशल डिसटेन्‍सींग दिलों पर लागू नहीं होती”! यह कितनी सही बात है ।

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और एक दिन हम पैदल जा रहे थे तो एक महिला अपने हाथ से हमारी ओर ऐसे दूर… दूर… जाने का इशारा कर रही थी । उसका रवैया हमारी ओर ऐसा था जैसे कि हम अछूत हों । स्‍वयं को बचाने के लिए हमें अशिष्‍ट और निर्दयी होने की आवश्‍यकता नहीं है, और कोई भय भी नहीं था… सिवाय उस महिला के मन के । और हम दो मीटर की दूरी से भी दूर थे । कुछ आत्‍माओं का मन पहले से ही भय से संक्रमित हो गया है । जब हम विश्‍वास करने और प्रेम करने से डरते हैं तो सच में हमें देखना है कि हम किस प्रकार के विश्‍व का निर्माण कर रहे होंगे । लेकिन क्‍या हम ऐसे संसार में रहना चाहते हैं?
तो, आज मैं आप सबसे अपनी सोच के बारे में थोडा स्‍वच्‍छंदभाव अपनाने के लिए निवेदन करती हूँ और जागरूक अवस्‍था में प्रेम और करूणा के मीम्‍स या शैलीयों का निर्माण करें । कहा जाता है कि हम अपनी आदतों की रचना हैं, तो हमें इन आदतों को भला, प्रेमपूर्ण, करूणामयी और सकारात्‍मक रूप से प्रेरणा देने वाली बनाना होगा ।

“जब आप बडे होते हैं, तो आपको मालूम पडता है कि आपके पास दो हाथ हैं, एक अपनी स्‍वयं की मदद करने के लिए,

और दूसरा दूसरों की मदद के लिए” – माया एंग्‍ल्‍यों

जब हम इस दौर से गुजरते हुए जब हम लोगों के सम्‍पर्क में आते हैं, तो हमारे पास अलग अलग स्‍तरों की समझ और सूचनाऐं होती हैं, तो बहुत जल्‍दी कोई भी धारणा नहीं बना लेनी है । कहानी अभी भी स्‍पष्‍ट हो रही है । सत्‍यता को अभी भी स्‍वयं को प्रत्‍यक्ष करना बाकि है । किसी भी फिल्‍म के बारे में हम तब तक निर्णय नहीं ले सकते जब तक कि हमने फिल्‍म का अंत ना देख लिया हो, उसी प्रकार लोगों के बारे में भी हम कोई धारणा ना बनाऐं जब तक कि उनका कार्य पूरा नहीं हो जाता ।

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प्रेम के मीम्‍स एक नये प्रकार का अनु‍कूलन है जो हमारी आत्‍मा में विकसित करने की आवश्‍यकता है । जो कि हमारे हृदय को बडा बनाऐगा और हमारे जीवन को और भी समृद्ध और खुशहाल । प्रेम की शैली मन को और नई सम्‍भावनाओं के लिए खुला रखती है… सच में, जब हम प्रेम को फिर से अपना लेते हैं, तो हम जैसे कि अपने घर या फिर अपनी सत्‍यता की ओर लौटते हैं, जो कि हम वास्‍तव में हैं, प्रेम स्‍वरूप ।
“लेकिन आत्‍मा का फल है प्रेम, खुशी, शांति, धैर्यता, करूणा, अच्‍छाई, निष्‍ठा ।” जलैटियन 5:22
अब सहनशीलता और समझ की नई संस्‍कृति बनाने की आवश्‍यकता है, सरकारों के साथ, चिकित्‍सा के क्षेत्र में, पुलिस और सुरक्षा विभाग के साथ… आदि । और स्‍वयं के साथ एक नई अवस्‍था में स्थित करना है, सहनशीलता और समझ की… हालात के साथ धैर्यता से पेश आऐं, स्‍वयं के साथ भी धैर्य रखें… प्रेम में रहें और अपनी शक्ति में रहें ।

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हम वर्तमान समय एक चयन के पल से गुजर रहे हैं, हम जीवन के दोराहे पर खडे हैं । हम प्रेम, शांति, आनंद, खुशी और करूणा की ओर जाने का चयन कर सकते हैं । या हम उस “साहसी नये संसार” में रहने का चयन कर सकते हैं जो कि भय, उत्‍तेजना और शंका से भरा है । आप कौन से का चयन करेंगे?
हम में से हरेक को वह चयन करना है, और उस चुनाव के आधार पर हम अपने संसार को बेहतर या खराब के लिए प्रभावित करेंगे । क्‍या हम भय की शैली को जारी रखना चाहते हैं, या हम अपने दिल से जीना चाहते हैं और प्रेम की शैली बनाना चाहते हैं । असल में हम सब प्रेम ही तो हैं । प्रत्‍येक आत्‍मा अपने पवित्रतम भाव में प्रेम स्‍वरूप है, सवाल है कि हम इस सत्‍य से कितने दूर हो गऐ हैं? जैसे न्‍यू टैस्‍टामैन्‍ट में लिखा है:

“चाहे तो पेड को अच्‍छा बनाओ, और उसके फल को भी अच्‍छा; या वृक्ष को दूषित बना दो और उसके फलों को भी दूषित;

क्‍योंकि एक वृक्ष अपने फलों के द्वारा ही जाना जाता है ।” मैथ्‍यू 12:33

अब समय है… वास्‍तिवकता का निर्माण करने का और उस संसार को बनाने का जिसमें हम सब रहना चाहते हैं । हम ऐसा बिल्‍कुल नहीं चाहते कि हम भविष्‍य के संसार में पहुँच जाऐं और सोचें हम यहॉं कैसे पहुँचे!

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