नई शुरूआत – नए आप! (New Beginnings – New You – In Hindi)

नई शुरूआत – नए आप!

नएपन के लिए हमारा उमंग स्वाभाविक है । असल में, हमें प्रत्येक पल नवीकृत होना है; हमारा शरीर निश्चित रूप से हमारे लिए यह स्वाभाविक रूप से करता रहता है, लेकिन कभी कभी हमारी आत्मा पीछे छूट जाती है । अगर फूल मुरझाऐंगे नहीं तो हमें आश्चर्य होगा । तो जब जीवन की बात आती है जब चीजे अपनी ऊर्जा, आवेग और रोचक अंश खो देती हैं तो हम चिंता करने लगते हैं! क्या यह भी जीवन के नियम के प्रमाण स्वाभाविक नहीं है?

कभी कभी जब जीवन में बड़े बदलाव लाने की बात आती है या कोई भी बदलाव लाने की बात आती है तो हम अपने सबसे बड़े शत्रु बन जाते हैं । हमारा अहंकार हमें राज़ी कर लेता है कि हम सही स्थान पर हैं, सही कार्य कर रहे हैं । फिर भी, शायद हमें ‘दूसरी ओर’ जाने का प्रयत्न करना चाहिए और देखना चाहिए । शायद हमें आश्चर्य हो ।

Listen to the Hindi…

 

अभी आरम्भ करें

कुछ नया आरम्भ करने के लिए हमें लगता है कि नया वर्ष उचित समय है, लेकिन हम किसी भी समय आरम्भ कर सकते हैं । मैं इस बात में और भी गहराई से विश्वास करने लगी हूँ कि जिस समय हमें इस बात की जागृति आ जाऐ कि मुझे कुछ बदलने की आवश्यकता है तो उस बात को उसी पल अमल में लाना है । केवल तभी उसमें वास्तविक शक्ति होती है । एक दृढ़ संकल्प वह संकल्प है जिसमे बहुत शक्ति होती है । एक वायुयान को धरती से उड़ने के लिए बहुत शक्ति की आवश्यकता होती है । इसी प्रकार एक विचार को भी ‘उड़ने’ के लिए दृढ़ता की आवश्यकता है । तो, पहला पाठ है, जैसे ही आपको अहसास हो कि स्वयं में कुछ बदलने की ज़रूरत है तो बस उसी पल आरम्भ कर दें । बेशक आप की शुरूआत छोटी हो… कोई बात नहीं, बस आरम्भ कर दें!

जब तक आप नहीं बदलेंगे कुछ नहीं बदलेगा

पहले मुझे बदलना है, ऐसा नहीं कि इसको परिवर्तन होना है, उसको परिवर्तन होना चाहिए । हम बाहय बातों को बदल सकते हैं जैसे नया जीवनसाथी पाना, अपने घर की मरम्मत करा सकते हैं, और शायद देश भी बदल सकते हैं, स्वयं को संतुष्ट करने के लिए पर्याप्त धन भी एकत्र कर रखा है… फिर भी अगर भीतर से हम वैसे ही हैं जैसे पहले थे, तो यह ऐसा ही है जैसे हमारे चारों ओर स्वर्ग का निर्माण करना लेकिन स्वयं के भीतर अभी भी असुर की प्रवेशता है । यह ऐसा ही है जैसे एक नये उद्यान का परिदृश्य है, फिर भी हमने पहले वाले ही मलीन चश्में पहने हैं, तो चाहे हमारे आसपास सबकुछ नया है मगर हम उसकी सराहना नहीं कर सकेंगे । तो अपने चश्मों को साफ करें और स्वयं को बदल लें और तब आपको अपने आसपास कुछ भी बदलने की ज़रूरत नहीं पड़ेगी – आपको अपने आप ही अंतर महसूस होगा ।

वर्तमान को बदलकर भूतकाल को बदल दें

भूतकाल को परिवर्तन करने का एकमात्र तरीका है कि मैं अपने वर्तमान पल को बदल दूँ, क्योंकि बहुत जल्द मेरा वर्तमान मेरा भूतकाल बन जाऐगा । अगर मैं ऐसा नहीं करती तो मेरा भविष्य ऐसा ही निर्धारित हो जाऐगा । जब मैं अपने कर्मों के बारे में जागरूक हो जाती हूँ और अभी से ही अपने कर्मों को भूतकाल से अलग करना आरम्भ करती हूँ, तब मैं स्वयं को बदल रही हूँ और मेरा भविष्य भी बदल जाऐगा । दूसरे भी समय के साथ उस बदलाव को देखेंगे, और बहुत शीघ्र मैं पूर्णतया बदल चुकी हूँगी और उनके मन में मेरी छवी भी!

परिवर्तन होने के लिए खुश रहें

अगर हम वास्तव में परिवर्तन चाहते हैं तो ऐसा सम्भव तभी हो सकता है जब हम खुशहाल अवस्था में हैं । अगर हम क्रोध में हैं, उदास या चिड़चिड़े हैं, तो निस्संदेह हम परिवर्तन करना चाहते हैं लेकिन वह बहुत मुश्किल होगा । हमें भीतर से प्रसन्न होना होगा और उसका कारण बाहर नहीं खोजना है । खुशी को बढ़ाने के लिए हमें ग्लास को आधा खाली नहीं बल्कि भरपूर देखने का चयन करना होगा । सदा ही धन्यवाद का भाव रखें । आत्मा में बदलाव लाने के लिए यह ऊर्जा ही काफी है ।

अपने डरों का सामना करें

हरेक इस बारे में बातें करता है, फिर भी कितनी बार हम यह वास्तव में करते हैं? या हम अपने आरामदायक क्षेत्र में अटके हैं? अगर आपको कोई भय है तो एकांत में शांति से बैठ जाऐं और कल्पना करें कि आपका डर किसी शेर या चीते के मुख जैसा है । अब महसूस करें कि आप अपना सिर उस मुँह में डाल रहे हो, और बहुत जल्दी ही, जब आप वस्तुत: और लाक्षणिक रूप से अपने भय का सामना करते हैं तो आप पाऐंगे कि वह लुप्त हो गया है, या आपके उपर उतना प्रभाव नहीं है जैसा पहले था । भय अक्सर हमारे मन में ही बढ़ जाता है – जैसा यह वास्तव में है उससे बड़ा प्रतीत होता है, लेकिन उसको टालने के बजाय उसका सामना करें, उसे पकड़ लें, उसके साथ नृत्य करें, उसे प्रेम करें अर वह बहुत छोटा बन जाऐगा ।

जाने दें

जो कुछ भी आपको पीछे खींच रहा है उसे जाने दें, उसको पकड़ने से कोई फायदा नहीं होगा । चाहे मन में जैसे पश्चाताप, अपराधभाव हो, या वह वस्तुऐं जिनकी आपको आवश्यकता नहीं है, इन सब को छोड़ने में समय लगता है । आपके लिए बहुत फायदेमंद रहेगा अगर आप जिस प्रकार अपनी अलमारी को व्यवस्थित करते हैं उसी प्रकार अपने मन को भी व्यवस्थित कर दें । पुराने को और बीते हुऐ को पकड़ कर रखना ऐसे ही है जैसे एक गेंद और जंज़ीर से स्वयं को बाँधना और उसके बावजूद उड़ने की और स्वतंत्र होने की अपेक्षा रखना । जानें दें और आप स्वतंत्र हो जाऐंगे ।

गाँधी का सिद्धांत : जो परिवर्तन आप देखना चाहते हैं वह स्वयं में लाऐं

अगर आप देश को या प्रदेश को स्वच्छ देखना चाहते हैं तो यह सुनिश्चित करें कि आप बिना कूड़ेदान के कहीं भी कूड़ा नहीं फेंकते हैं । अगर आप प्रेम और आदर चाहते हैं तो सबसे पहले इन गुणों को व्यक्त करें । अगर आप शांति और व्यवस्था चाहते हैं तो सबसे पहले उसका पदर्शन करें । अगर आप दयालुता चाहते हैं तो स्वयं दयालु बनकर आरम्भ करें । जब हम परिवर्तन होते हैं तो दूसरों को भी परिवर्तन करने के लिए हिम्मत देते हैं ।

यहाँ कुछ प्रशन दिये हैं जिन पर आप विचार कर सकते हैं । थोड़ा हल्का संगीत बजाईऐ, सवालों को पढ़ें और जैसे आप सवालों को समझते जाऐं उनका उत्तर देते जाऐं । कोई उत्तर सही या गलत नहीं है । जो भी जवाब आपके मन में आता है वही सही उत्तर है!

2016 को पीछे मुड़कर देखना

सबसे बड़ी शिक्षा कौन सी है?

अपने तीन ‘वरदानों’ की सूची बनाऐं ।

आप सबसे अधिक जीवंत कब अनुभव करते हो?

आप किसको प्रोत्साहित करते हो?

वर्तमान पल

अपने जीवन में इस समय आप क्या आर्कषित करना चाहेंगे?

अगर आपका शरीर बात कर सकता तो कहता … (इस वाक्य को पूरा करें)

इस परिस्थिति में कौन सा मूल्य गुप्त रूप में हैं? (जो भी परिस्थिति आपके मन में आती है)

आप कौन सी ‘भाषा’ बोलते हैं? (जिन शब्दों का आप चयन करते हैं)

अपने व्यक्तित्व की कौन सी विशेषतओं पर आपको और अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है?

2017 और उससे आगे

मेरा दिन बिताने का सबसे आदर्श तरीका कौन सा होगा?

मैं स्वयं की ऱफतार…करके धीमी करूँगा । (खालीस्थान भरें)

उन शब्दों की सूची बनाऐं जिन्हें आप प्रतिदिन सुनना चाहेंगे ।

क्या बात है जो आपको रोक रही है? (देखें कौन सा व्यक्ति या परिस्थिति आपके मन में आती है)

आपकी विरासत क्या होगी?

स्वयं के लिए आपका आदर्श अवलोकन क्या है?

नारियल मेरे लिए एक चिन्ह है – बाहर से सख्त और अंदर से नर्म! और मुझे नारियल बहुत पसंद भी हैं!

अब, अपने आपको शांत कर दीजिऐ, अपने भीतर जाईए और चयन करके अपना एक चिन्ह बना दें (इसे रंगबिरंगा बना दीजीऐ) जो आपके आने वाले वर्ष के लिए आपका मूल विषय होगा । अपने चिन्ह को अक्सर देखें । यह किस प्रकार आपको और नए वर्ष की आपकी आकांक्षाओं को किस प्रकार दर्शाता है? यह किस प्रकार आपको प्रोत्साहित करता है? यह किस प्रकार आपको आपकी आंतरिक शक्तिओं, विशेषताओं और मज़बूती की याद दिलाता है, और जो आप बनना चाहते हैं, उस ‘नए आप’ के करीब कैसे लाऐगा?

2017 और आगे के लिए भी शुभकामनाऐं ।

‘नव आप’ के लिए मंगल कामनाऐं ।

अब समय है… नई शुरूआत करने का!

 

 

Listen to the English version…

 

© ‘It’s Time…’ by Aruna Ladva, BK Publications London, UK

 

 

Join the "It's Time to Meditate" Blog and get these
weekly blog posts sent to your email
Your email is safe with us and we will not share it with anyone else, you can unsubscribe easily
at any time

Leave a Reply

XHTML: You can use these tags: <a href="" title=""> <abbr title=""> <acronym title=""> <b> <blockquote cite=""> <cite> <code> <del datetime=""> <em> <i> <q cite=""> <s> <strike> <strong>