एक नया भारत – लोकतंत्र और जनता की ताकत

एक नया भारत – लोकतंत्र और जनता की ताकत

हर शुभ कार्य जो उसने नहीं किया, प्रत्‍येक मनुष्‍य उसके लिए गुनहगार है

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भूतकाल में भारत ने विभिन्‍न धार्मिक पृष्‍ठभूमि के लोगों को घर, आरामदायक और सुरक्षित स्‍थान प्रदान किया है । जबकि उन लोगों के स्‍वयं के देशों ने उन पर प्रतिबंध लगाया, उन पर जुल्‍म किया और उन्‍हें अस्‍वीकार किया, लेकिन भारत ने उनका स्‍वागत किया, और उन्‍‍हें अपने विचार व्‍यक्‍त करने की अनुमति दी । संसार की सबसे पुरानी सभ्‍यताओं पर एक नजर दौडाऐं, ऐजटेक, ईन्‍का, रोमन आदि । वे बहुत सफल और उन्‍नतिशील सभ्‍यताऐं थी । लेकिन अब उनका क्‍या हाल है ? आज भारत विश्‍व के दो महान लोकतंत्रों में से एक है – हमें यह प्रतिष्‍ठा नहीं गंवानी है ।

दुर्भाग्‍यवश, हमने समस्‍त संसार में बहुत से अन्‍याय होते हुए देखे हैं और अब भी देख रहे हैं । मैं पत्रकार नहीं हूँ, ना ही मैं राजनेता ह‍ूँ, ना ही मानव अधिकार कार्यकर्ता हूँ । लेकिन, गुणों, मूल्‍यों और अभिव्‍यक्ति की स्‍वतंत्रता… और भारत माता में लोकतंत्र को लेकर मैं बहुत भावुक हूँ । अभी पिछले कुछ दिनों में भारत के उत्‍तर पश्चिम में कुछ घटनाऐं घटी हैं जिनके बारे में मैं भी अपने विचार व्‍यक्‍त करना चाहूँगी ।

 सत्‍ता में अज्ञानता और असहनशीलता के होने से खतरनाक कुछ भी नहीं

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भारत में हाल ही में घट रही घटनाओं के बारे में आप में से शायद कुछ को ना मालूम हो या मालूम हो भी । अर्नब गोस्‍वामी, भारत के नम्‍बर एक समाचार नेटवर्क, रिपब्लिक टीवी (अंग्रेजी), और रिपब्लिक भारत (हिन्‍दी) के मालिक, मुख्‍य संपादक को अवैध रूप से और भयावह और चौंका देने वाले तरीके से गिरफतार कर लिया गया ।

4 नवम्‍बर को, सुबह 6:30 बजे, पुलिस, कमानडो और विशेष दल उसके घर में पहुँचे । उन्‍होंने कहा कि वे एक ऐसे केस को फिर से खोलना चाहते हैं जिसे न्‍यायालय ने 2018 में बंद कर दिया था । इसलिए उन्‍होंने कानून अपने हाथों में लिया और वे AK47 के साथ पहुँचे । वे बहुत बडी संख्‍या में पहुँचे, जैसे कि वे किसी तानाशाह या आतंकवादी को पकडने आऐ हों और उसे उसके घर से घसीट कर बाहर ले आए…    उसे जूते पहनने का भी मौका नहीं दिया… और पुलिस बस में धक्‍का देकर बिठा दिया । कर दाताओं के पैसे का प्रयोग कर के उन्‍होंने पूरी तरह से भौतिक शक्ति का प्रयोग किया । उसकी पत्नि और बेटे ने यह सब कैमरे में कैद कर लिया था, इसलिए पूरा घटनाक्रम उसी समय टीवी पर लाइव चल रहा था ।

पिछले कई महीनों से महाराष्‍ट्र की सरकार और इसकी पुलिस, अर्नब गोस्‍वामी को, इनके चैनल को और स्‍टाफ को तंग कर रही है । उन्‍होंने कई केस दर्ज किये हैं जो बाद में झूठे सिद्ध हुए । लोगों की आवाज के रूप में अर्नब एक प्रतिष्ठित पत्रकार हैं और भारत में एक दशक से भी अधिेक से नम्‍बर एक समाचार एंकर हैं । फिर भी, बहुत से लोग उनके रिपोर्ट करने के निर्भीक तरीके और उनके सवाल पूछने पर आपत्ति जताते हैं । अर्नब जानते हैं कि वे उत्‍तेजित कर रहे हैं लेकिन घटना की सत्‍यता की तह तक जाना उनके खून में है । बहुत कम लोग हैं जो सत्‍य की तह तक जाने के लिए अपनी जिन्‍दगी दॉंव पर लगा देंगे । उत्‍तेजित करना या परेशान करना, चाहे स्‍थानीय सरकारी मुलाजिम हों, या पैसे और पावर वाले लोग हों या फिर पुलिस ही क्‍यों ना हो ।

जब सरकार गलत हो तो सही होना खतरनाक है

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इस नये भारत में लोगों को अभी उसकी खोजी पत्रकारिता के तरीके की आदत पड ही रही है । दो साल पहले अर्नब ने अपना चैनल शुरू किया ताकि‍ वह स्‍वायत्‍तता का प्रयोग कर सके । एक साक्षात्‍कार में नऐ पत्रकारों को अर्नब ने कहा कि: “किसी से भी अहसान नहीं लेना चाहिए क्‍योंकि बाद में जीवन में यही अहसान लेना आपके लिए नुकसानदायक सिद्ध होगा ।” जीवन जीने के लिए यह कितना सही सिद्धांत है । इस खरी और सत्‍य को खोजने के रिपोर्टींग के तरीके के कारण, और साथ ही जिसे दूसरे लोगों ने उतना महत्‍व नहीं दिया, लोगों की उन समस्‍याओं को उठाने के कारण ही भारत के और विश्‍व भर के लोग अर्नब को समर्थन करते हैं । ये भी एक कारण है जिसके कारण दोषी उसे पसंद नहीं करते हैं । सत्‍यता वह चमक है जो हम सबके हृदय को छू लेती है ।

उसको न्‍यायिक हिरासत से छुडाने की मांग में असंख्‍य लोग समर्थन में सडकों पर उतर आऐ हैं । वे चिल्‍ला रहे हैं  “अब बहुत हुआ” । दिन रात पोस्‍टर और मशाल हाथ में थामे हुए । यह बहुत गजब की बात है कि अर्नब को इतना बेमिसाल समर्थन मिला । अर्नब केवल एक व्‍यक्ति नहीं है, लेकिन वह एक आंदोलन बन रहा है । लोग समर्थन में उतर रहे हैं, केवल एक व्‍यक्ति के लिए नहीं, लेकिन न्‍याय के लिए; लोकतंत्र के अधिकार के लिए; स्‍वतंत्र प्रेस और अभिव्‍यक्ति की स्‍वतंत्रता के लिए । जहां मानव अधिकारों की अवहेलना हो रही है वहां सोशल मीडीया भी अपना पात्र निभा रही है । जनता इतनी भोली नहीं है जितना हम सोचते हैं । हरेक कर्म प्रत्‍यक्ष है और स्‍पष्‍ट है ।

भारत दोषहीन नहीं है और इसमें बहुत कमियां हैं । लेकिन हाल ही में हम एक ‘नये भारत’ का उदय देख रहे हैं । जहां भारत के लोग अपनी शक्तियों के बारे में जागरूक हो रहे हैं जो उनके हाथ में हैं, केवल मोबाईल फोन की बात नहीं है । लेकिन सोशल मीडीया की और इंटरनेट की ताकत से उन्‍हें अपनी ताकत का अहसास हो रहा है कि हर आवाज अहम है ।

असल में, इसी प्रकार की बातें हम अमेरीका के चुनाव में भी देख सकते हैं… ‘जनता की ताकत’!

जो कुछ आप कहते हैं हो सकता है उससे मैं सहमत ना हूँ, लेकिन व‍ह व्‍यक्‍त
करने की आपकी स्‍वतंत्रता का मैं अंत तक बचाव करूँगा

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अभिव्‍य‍क्ति की स्‍वतंत्रता का अधिकार, अपशब्‍द और अधर्म को छोडकर, सभी लोगों का मूलभूत अधिकार है । हमें बहुत सचेत रहना होगा कि हमारी स्‍वतंत्रता हमारे हाथों से फिसल ना जाऐ । हमेंशा ही वे लोग होंगें जो सच के लिए खडें होगें । ईतिहास ऐसे लोगों की सूची से भरा पडा है, लेकिन आज और भारत के लिए अर्नब है… कल कौन होगा?  हो सकता है आप हों या मैं!!   क्‍या हम तैयार हैं?

 

अब समय है… उनका समर्थन करने का जो हमारी स्‍वतंत्रता की रक्षा के लिए आवाज उठाते हैं ।

 

 

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One Response to “एक नया भारत – लोकतंत्र और जनता की ताकत”

  • Thanks Aruna ji for taking up this topic. When a Spiritual leader like you Speaks about these matters which are related to common man than it gives us a ray of hope. God bless you!

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