आत्मसमर्पण करने से बेहतर है लचीला बनें – Resilience Not Resignation (In Hindi)

आत्मसमर्पण करने से बेहतर है लचीला बनें

Image by Steve Buissinne from Pixabay

हाल ही में समस्त संसार से बहुत से लोगों के परिक्षण और पीड़ा की बहुत सी कहानियाँ बहुत हताश करने वाली हैं । चाहे तो कोई अकेला है, या किसी की नौकरी चली गई है, और या फिर किसी प्रकार का नुकसान उठाया है । एक लड़की की दुख भरी कहानी में उसके बॉयफ्रैंन्ड ने उसे इस पूर्ण लॉकडाउन में छोड़ दिया । अभी तो मौका था एक दूसरे का सहारा बनने का! जिस भी हालात में आप हैं उससे निराश नहीं हों, क्योंकि अभी तो वह समय है जब हमें आतंरिक लचीलापन विकसित करना है । हमें अपने मन को स्पष्ट और एकाग्रचित रखना है, और हम अपनी आंतरिक शक्ति को बढ़ाऐं, आज और कल से पार जाकर देखें । वर्तमान समय मैं आप सबको अपनी आंतरिक शांति को ढूँढने के लिए प्रोत्साहित करती हूँ ।

हम सभी ने इस प्रकार की कहावतें बहुत बार सुनी हैं, कि प्रत्येक समस्या छदम्वेष में एक सुअवसर है और… “हरेक निराशा में भी एक उम्मीद की किरण होती है” । लेकिन स्वभावत: जब हम समस्या से घिरे होते हैं तो ये सब याद रख पाना मुश्किल होता है । लेकिन हमें कोशिश करके केवल सकारात्मक को ही देखना है; हम इस सबसे बाहर आना चाहते हैं बिना इस अहसास के कि हम पागल से हो गये हैं ।

इसी प्रकार, ये सबक हमें कुछ सिखाने के लिए ही आऐ हैं । अगर विद्यार्थीयों की परिक्षाऐं ना हों, तो उन्हें कैसे मालूम पड़ेगा कि उन्होंने कितनी प्रगति की है? तो यहाँ भी, ज़िन्दगी हमें यहाँ से वहाँ से परीक्षाऐं भेजती रहती है, और वास्तव में वह हमारे भीतर देखने के लिए ही है । हमें स्वयं को भीतर से ठीक करना है और हालात को, या व्यक्ति को, बाहर से ठीक नहीं करना है । अगर हम यह तरीका अपनाऐं, हम बहुत आगे बढ़ सकते हैं, हम परिक्षाओं के लिए तैयार रहेंगे, ताकि हम उन्हें सम्पूर्ण रूप से पास कर सकें ।

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और हमें यह कैसे मालूम पड़ेगा कि हम परीक्षा पास कर रहे हैं? जब हम अपने असली स्वभाव में स्थित रहते हैं: अर्थात अपने गुणों में स्थित रहना । जब हम अपने गुणों और शक्तियों के मालिक होते हैं, ना कि अपने अवगुणों के दास । फिर हम स्वयं के साथ, दूसरों के साथ और हालातों के साथ शांति में रह सकते हैं । जब हम खुश रहते हैं तो, फिर प्रेम और करूणा हमारे हृदयों से प्रवाहित हो सकती है । तब हमें मालूम होगा कि हम ठीक हैं और हमने दुख की छाया अपने जीवन पर पड़ने नहीं दी ।
जब हम अपने ड्रामा के पीड़ीत बन जाते हैं, तो हम हताश और निराश हो जाते हैं । फिर हममें हालातों का सामना करने की शक्ति नहीं रहती, हम सदा ही एक रक्षक की प्रतिक्षा कर रहे होते हैं कि वह आऐ और हमें बचाऐ । तब हम हालात के प्रति निराशाजनक हो जाते हैं और पूरी तरह से हार मान लेते हैं ।

हम भगवान को शिकायत करते हैं, हम उनसे झगड़ा करते हैं, हमारा भगवान से विश्वास उठ जाता है और हम कहने लगते हैं अब हमसे नहीं होगा । हम भगवान को पुकारते हैं कि अब उसको आकर हमें मदद करनी होगी! और भगवान इसका क्या जवाब देंगे? क्या बस इसी कारण से हम ईश्वर को पुकारते हैं? केवल जब हम मुश्किल में होते हैं!? असल में हम कभी भी ऐसे सम्बन्ध में रहना नहीं चाहेंगे जो इतना ‘प्रतिबन्धात्मक’ और रोब जमाने वाला हो । तो भगवान के लिए अलग क्यों हो? क्या परमात्मा का कोई स्वाभिमान नहीं है? मैं अपनी माँ को बहुत बार यह कहते हुए सुना है: “हर कोई भगवान को दुख के समय याद करता है, खुशी में नहीं ।” और क्या यह सत्य बात नहीं है । जब हम हालातों को और हमारी ‘नियंत्रित करने की आवश्यकता’ को भगवान को समर्पित कर देते हैं, तब असल में हम एक स्वतंत्रता का अनुभव करते हैं और बातें अपने आप सुधरने लगती हैं ।

तो, पहले हमें आंतरिक शांति को पाने की आवश्यकता है । अपने स्वयं के श्रेष्ठ स्वरूप से बाते करें । किसी भी हाल में भगवान से बातें करें… ‘बात’ शब्द पर ध्यान दें… शिकायतें नहीं! और कम से कम अपने विचारों और भावनाओं की ज़िम्मेवारी लें, और अपनी स्वयं की संभाल करें । यह मेरा विचार है, और तभी आ सकता है जब मैं जो कुछ भी घटित हो रहा है या हो चुका है उसको मैंने स्वीकार करके उसके साथ शांति स्थापित कर ली है । उस के बाद मुझे स्पष्टता और समझ आती जाती है… और मैं स्वयं को शक्ति से भर सकती हूँ । जैसे ही मैं और अधिक आंतरिक बल जमा कर लेती हूँ, तो यह मुझे, जो मेरे विश्वास के अनुसार सही है और मेरे मूल्यों के हिसाब से एकत्रीकरण में , वह करने की प्रबल प्रेरणा देता है । और इस भावना में मैं आसानी से सफलता पा लेती हूँ ।

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यह देखना अच्छा रहेगा कि क्या होगा जब ‘लॉकडाउन’ हट जाएगा । इस समय से जो भी सकारात्मक हमने सीखा है उसे अपने जीवन में बरक़रार रखने का पुरूषार्थ करना चाहिए ।
शांति ही आपके जीवन का सिद्धांत हो
अपनी शक्ति को याद रखें
एकत्रीकरण को बरक़रार रखने के लिए दृढ़ वचन का अभ्यास करें
प्रकृति से जुड़ें
चुनाव करें एक सेहतमंद जीवन जीने के तरीके का
जो लोग आपके जीवन में महत्वपूर्ण हैं उनका ध्यान रखें
धन्यवाद का भाव रखकर जीवन के प्रति और अधिक सराहनीय बनें
अपने मन को करूणा और अच्छे विचारों और भावनाओं से भर कर रखें
आपके कर्म गुणों से भरपूर हों

अब समय है… अपने आंतरिक लचीलेपन का निर्माण करने का । अपने गुणों और शक्तियों का मालिक बनने का न कि अपनी कमियों का दास

 

© ‘It’s Time…’  by Aruna Ladva, BK Publications London, UK

 

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