अपने जीवन को प्रकाश से भर दें – दीवाली की शुभकामनाऐं (Light up Your Life – Happy Diwali – in Hindi)

अपने जीवन को प्रकाश से भर दें – दीवाली की शुभकामनाऐं

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आमतौर पर दीवाली को प्रकाश का त्यौहार माना जाता है । पांचों महाद्वीपों में हिन्दुओं के लिए दीवाली सबसे मशहूर त्यौहार है और इसे बहुत धूमाधाम से मनाया जाता है । लेकिन राजयोग में आने के बाद ही मुझे इस सुन्दर, रंगबिरंगे उत्सव का गहरा अर्थ समझ में आया ।

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‘दीवाली’ नाम ‘दीपावली’ शब्द का संक्षिप्त रूप है, जिसका अर्थ है ‘दीपों की माला’ । माटी के छोटे ‘दीपकों’ मे तेल भरा जाता है और कपास की बाती को उसमें डूबोया जाता है । दीपकों को मुख्य रूप से दीवाली के दिन ही जलाया जाता है, वैसे बहुत से लोग इन्हें दीवाली से पहले ही जलाना आरम्भ कर देते हैं, जैसा कि क्रिसमस में होता है । लोग अच्छे शगुन के लिए अपने घरों के बाहर दहलीज़ पर रंगबिरंगे रेत से रंगोली बनाते हैं । वे दीवाली से पहले अपने घरों के कोने कोने की सफाई करते हैं और ऐसी मान्यता है कि ये स्वच्छता और सारी रात जलते हुए दीपक धन की देवी लक्ष्मी को घर में आकर्षित करेंगे! पटाखे भी चलाऐ जाते हैं क्योंकि ऐसा माना जाता है कि इससे प्रेतआत्माऐभाग जाती हैं ।दीवाली के दिन हर कोई नए कपड़े पहनता है और परिवार और दोस्तों को शुभ कामनाऐं दी जाती हैं, दीवाली के लिए विशेष बनाया हुआ नमकीन और मीठा अल्पाहार आपस में बाँटा जाता है । बहुत से भगत व्यापारी इस शुभ दिन नया खाता खोलने पर भी ज़ोर देते हैं, वे यह मानते हैं कि ऐसा करने से पूरे वर्ष लक्ष्मी (धन एवं प्रचूरता) आऐगी ।

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हिन्दू पौराणिकता के अनुसार दीवाली का सबसे महत्वपूर्ण पहलू, राजा राम का 14 वर्ष के वनवास के बाद वापिस अपनी राजधानी में लौटना है । दीवाली बुरे पर अच्छे का प्रतीक है । जैसे ही राजा राम वापिस आऐ तो उदास और गम्भीर राजधानी में चाँदनी, आनंद और खुशियाँ एक बार फिर से लौट आईं । दीपकों की माला ने महान राजा का स्वागत किया ।

अगर हम इन सब बातों को आध्यात्मिक संदर्भ में रखें तो असल में हम वह वह चैतन्य दीपक हैं । मिट्टी देह का प्रतीक है और बाती आत्मा है । और तेल का अर्थ है जीवन के अनुभव । जब हम ज्ञान रूपी तेल (विवेक) को जीवन में अपनाते हैं और परमपिता से अपना सम्बन्ध जोड़ते हैं, तो हम प्रकाशित हो जाते हैं, प्रबुद्ध बन जाते हैं और उस प्रकाश को दूसरों के साथ बाँटना प्रारम्भ कर देते हैं । जब हम में से प्रर्याप्त लोगों की संख्या साथ आऐगी तो उससे संसार उज्जवलित हो जाऐगा । संसार का अंधेरा लुप्त हो जाऐगा ।

हमें भी अपना आंतरिक ‘घर’ अर्थात अपना मन और अपनी आदतें स्वच्छ करनी होगीं और आंतरिक प्रचुरता और अच्छे गुणों की दौलत का अर्थात ‘लक्ष्मी का आहवान’ करना होगा । राजा राम की तरह हमें फिर से अपना स्वराज्य प्राप्त करना है और ‘आंतरिक राजधानी’ अर्थात सच्चे स्वाभिमान के सूक्ष्म सिंहासन पर फिर से लौटना है । जब हम सभी अपनी आत्माओं की रोशनी जला लेते हैं तो समस्त विश्व आनंद मनाऐगा । फिर से नये युग का उदय होगा!

अब समय है… नवीनता का! अपने कर्मों को स्वच्छ करने का और बुराईयों को भगाने का । नए खाते खोलने का और अपने सम्बन्धों को नवीकृत करने का । नई परिकल्पना और नज़रिये को विकसित करने का । सबसे महत्वपूर्ण है एक नए जीवन का आरम्भ करने का । अब समय है सभी को मीठे शब्द बोलने का और निरंतर खुशियाँ मनाने का – चाहे पटाखे हों या नहीं हों!

 

© ‘It’s Time…’ by Aruna Ladva, BK Publications London, UK

 

 

 

 

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