अतुल्य भारत III (Incredible India III – in Hindi)

अतुल्य भारत III

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भारत, जिसे अक्सर इतिहासकारों ने संसार की माता के रूप में संबोधित किया है और अंग्रज़ों ने ताज का मणि कहा है, प्रत्येक आगंतुक का इस असाधारण और जादूई भूमि से दिल नहीं भरता ।

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अक्सर भारत से प्रेम-घृणा का सम्बन्ध होता है । आप इसे इसकी ‘स्वतंत्रता’, सुंदरता, अनेकता में एकता, धार्मिक सहिष्णुता, विभिन्नता आदि के कारण प्रेम कर सकते हैं और इसके भ्रष्टाचार, पिछड़ेपन (इसके उन्नत तकनीकी ओहदा हासिल होते हुए भी), सफाई की कमी, और फिर भी इसके आरामदायक क्षेत्र में अड़े रहने के स्वभाव के कारण आप इससे घृणा भी कर सकते हैं!

वर्तमान समय गायों को ना मारने के विषय में विशाल विवाद चल रहा है । भारत में हमेंशा से ही गायों को बहुत पूज्य माना गया है । गायें दूध देती हैं और उनका गोबर ईंधन के रूप में प्रयोग होता है । इसके अतिरक्त गायें बहुत शरीफ़ होती हैं, बिल्कुल भी आक्रामक नहीं होती और अहिंसक होती है । अब तक आप मेरे बारे में भी जान चुके होंगे कि मुझे जानवरों से बहुत स्नेह है और इसलिए उनको ना मारने की मेरी प्राथमिकता धार्मिक नहीं है, लेकिन पूरी तरह से सहानुभूति पर आधारित है ।

भारत में भ्रष्टाचार सदा ही संभावित है । बहुत कम काम हैं जो बिना रिश्वत के होते हैं । काश ये लोग अपने सदियों पुराने कर्मों के सिद्धांत के फ़लसफ़े के बारे में जागरूक हों जाऐं! रिश्वत लेना और इसे बढ़ावा देना चोरी करना है । यह दिन दहाड़े लूट है । इससे जिस साफ़, सुरक्षित और न्यायकारी व्यवस्था का दावा भारत करता है उसका निर्माण नहीं होता ।

India Rajasthan Jodhpur. Blue city street life photography

बलात्कार की घटनाऐं काबू से बाहर हैं । युवा और बुर्ज़ूग दोनों ही इस अपराध के दोषी हैं । ब्रहमाकुमारीज़ में ‘काम महाशत्रु है’ यह मुख्य शिक्षा है । इस विकार के अर्न्तगत हम देखते हैं ‍कि किस प्रकार एक मनुष्य दूसरे की मानव मर्यादा को छीन लेता है । मुझे नहीं लगता कि इससे नीच कोई कर्म हो सकता है!

दूसरी ओर, भारत बहुत विकास कर रहा है । हवाई अड्डे और बुनियादी ढांचा बहुत तीव्र गति से विकास कर रहें हैं । भारत बहुत स्वच्छ हो रहा है क्योंकि अधिक से अधिक लोग “स्वच्छ भारत अभियान” के बारे में जागरूक हो रहे हैं! परन्तु ध्यान रहे कुछ लोग अब भी हैं जो अपनी बालकनी से कूड़ा फेंकते हैं, और नालों और झीलों को गंदा करते हैं!

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मुझे यहाँ स्वतंत्रता का आभास होता है । लोग सुबह तक तेज़ आवाज़ में संगीत बजा सकते हैं, कहीं भी कुड़ा फेंक सकते हैं (लगभग कहीं भी!), सड़क पर किसी भी दिशा में गाड़ी चला सकते हैं और कहीं भी अपना घर बना कर खड़ा कर सकते हैं । हो सकता है मैं थोड़ा बढ़ा चढ़ा कर कह रही हूँ, लेकिन बिना किसी संदे‍ह के कहा जा सकता है कि यह बहुत “स्वतंत्र” देश हैं!

भारतीय लोगों को तस्वीरें और मूर्तियाँ बहुत पसंद हैं । ये किसी भी पत्थर को, उसे पेंट करके, कपड़े पहना कर और फल और मिठाईंयाँ इसके आगे अर्पण करके देवता बना सकते हैं । यहाँ तक कि राजमार्गों पर, तीव्र ढलान वाले पहाड़ों पर भी, जहाँ उसे देखने के लिए बहुत कम लोग ही चढ़ सकते हैं ।

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चाहे डर के कारण या प्रेम के कारण लेकिन यहाँ हर कोई ईश्वर से बहुत स्नेह करता है । एक हंसी की बात है कि हर कोई स्वर्ग के गेट तक पहुँच गया । कुछ लोगों को भगवान कह रहे थे बायें तरफ जाओ जहाँ स्वर्ग है, और कुछ को कहा दायें जाओ जहाँ नर्क है । अमीर व्यक्ति जिसने बहुत प्रचुरता से दान किया था वह कतार में प्रतिक्षा कर रहा था, फिर एक टैक्सी ड्राईवर भगवान के समक्ष पहुँचा । ईश्वर ने उससे कहा, ओह मेरे लायक पुत्र! आपका स्वागत है! आप बायें जाओ! जब अमीर व्यक्ति परमात्मा के पास पहुँचा तो भगवान ने केवल इतना ही कहा कि आप दायें जाओ । उसने कहा, ‘लेकिन भगवान मैंने तो करोड़ों का दान किया है। उसका कोई हिसाब नहीं है क्या? और आपने किस आधार पर उस मूर्ख टैक्सी ड्राईवर को स्वर्ग में भेज दिया’ । ईश्वर ने बहुत शांति से जवाब दिया, ‘उस टैक्सी ड्राईवर के साथ जब भी लोग होते थे तो उन्हें बहुत डर लगता था और इस कारण वे मुझे तभी सर्वाधिक याद करते थे!’

ईश्वर के प्रति उनका प्रेम बहुत ऊँचे दर्जे का है । सर्वप्रथम ईश्वर का नाम लिए बिना कुछ भी कार्य का आरम्भ नहीं होता । आप किसी कार का उद्घाटन करते हैं तो परमात्मा की तस्वीर वहाँ लगायी जायेगी । आप कोई दूकान खोलते हैं या कोई व्यापार आरंभ करते हैं तो पहले परमात्मा की पूजा की जाती है । बेटा पहली बार स्कूल जा रहा है तो पहले उसे मंदिर में जाना होगा । पहली तनख्वहा भी दान में दी जाती है । परीक्षा में बैठने पर परमात्मा से परीक्षा में उतीर्ण करवाने की गुहार लगाई जाती है!

भारत सदा से ही मनोहर देश है । इतना उदार पंथी, इतना अव्यव्स्थित और इतना विविधतापूर्ण और फिर भी… सब इतना सहजता से कार्यांवित हो जाता है!

ओम शांति

 

 

 

 

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