अतुल्य भारत आज भी अतुल्य है (Incredible India is still Incredible in Hindi)

अतुल्य भारत आज भी अतुल्य है

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जैसे ही मैने धूल से लदी हुई और मैली रेल की खिड़की से बाहर देखा तो मुझे बहुत ताज्जुब हुआ कि कभी भव्य और आलिशान रहा साम्राज्य आज कितना गिर गया है । मैं आबू रोड से दिल्ली जा रही थी । दिल्ली, जो कभी परिस्तान कहलाती थी, आज धूल और कचरे का मैदान बन गया है! फिर भी भारत में एक आकर्षण, मिठास, शांति और स्वाधीनता का जो अहसास है वह और कहीं नहीं है । यह अद्वितीय है कि इसके उत्तर में मज़बूत हिमालय पर्वत है, दक्षिण में गहरे गर्म महासागर हैं और इसके मध्य के भूदृश्य आप कल्पना कर सकते हैं । इसमें अद्भुत विविध प्रकार की भाषाऐं, धर्म, परम्पराऐं, संस्कृति, पहनावा और पाक- शैली का संगठन है – यह वास्तव में अविश्वसनीय है!

Himalayan Mountains View from Mt. Shivapuri, Shivapuri Nagarjun National Park

 

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भारत मुझे उस बहुत बुढ़ी और फटेहाल स्त्री के सदृश्य लगता है जो अपने जीवनकाल में अविश्वसनीय इतिहास की गवाह बनी है । बचपन की पवित्रता, सुंदरता और निर्मलता से शादी और मातृत्व फिर तलाक, एक बार फिर मुक्ति और अंत में उसका बलात्कार किया गया ।

मेरी रेल-यात्रा के दौरान मैनें कई विषम और विरोधाभासपूर्ण दृश्य देखे । हरे उद्यानों और घाटीयों के बीच बसे हुए बहुत से पश्चिमी ब्रांड के मुख्यालय, आधुनिक गगनचुंबी इमारतें और मेरसक स्टील कन्टेनर, जो बता रहे थे कि भारत प्रगति पर है! और फिर दूसरे कई स्थानों पर बहुत अधिक गरीबी: लोग नालों के पास जर्जर हालत में झोपड़ी में रह रहे थे, बेघर लोग भोजन की चाह में गुब्बारे या केले बेच रहे थे । गली के बच्चे मक्खियों और गंदगी से छितराऐ हुए सड़क के किनारे अपना समय काट रहे थे ।

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रेल एक स्टेशन पर दस मिनट तक रूकती है (आमतौर पर केवल दो मिनट ही रूकती है!) । बहुत से लोग इस का लाभ उठाकर वातानुकूल की हवा से बाहर धूल-धूसरित स्टेशन की बदबूदार हवा में अंगड़ाई लेने के लिए उतर जाते हैं! जीवन का सबकुछ हमारे सामने घटित हो रहा है । कोई नीम की छड़ी से दातुन कर रहा है, कोई भारतीय रेल जलघर के सौजन्य से नहा कर लौट रहा है, कुछ लोग प्लेटफार्म की दीवार के सहारे अपना व्यक्तिगत कार्य कर रहे हैं । कसकर बंटे हुए बालों वाले सन्यासी अपने अगले भोजन के लिए भीख मांग रहे थे, जबकि खानाबदोशों का झुंड अपने थोड़े से सामान के साथ फर्श पर बैठा था ।

उत्साहित भोजन बेचने वाले इस थोड़े समय में अच्छा व्यापार कर लेते हैं! सिका हुआ और तला हुआ गर्म गर्म भोजन सीधा चूल्हे से आ रहा था । दूर से ऐसा लग रहा था कि नमकीन या मीठी प्रत्यके वस्तु किशमिश से ढकी हुई है, जब तक कि वह ‘किशमिश’ उड़ना ना आरम्भ कर दे!

चाय स्टैंड एक और विलक्षणता है । यह पश्चिम के स्वास्थ्य और स्वच्छता के अधिनियमों को कभी पास नही कर सकेगी । चाय बेचने वाला एक पुराने पुन: चक्रित षट्कोणिय सिलवर के टिन में चाय बना रहा था । कप सारा दिन बार बार एक ही पानी में धोये जाते हैं! फिर भी जुगाड़ू स्टूल पर बैठ कर, गाढ़ी भारतीय चाय की चुस्की लेते, अपना अपना समय व्यर्थ करते हुए ग्राहक बहुत खुश हैं ।

Traditional holi festival.Holi Festival is a religious celebration of some kind of ''gospel''. People celebrate of refreshing,fertility and upcoming spring

भारत में सड़कों पर किसी का एकाधिकार नहीं है । केवल भारत में ही आप कार, साईकिल, रिक्शा, हाथी, ऊँट, बैल, गाय और कुत्ते आदि को खुशी खुशी हाईवे को सांझा करता हुआ पाऐंगे । और स्कूटर पर पूरा परिवार और उनका एक के उपर एक रखा हुआ ढेर सारा सामान! सड़कों पर इस स्तर का तालमेल और सहयोग मुश्किल ही कहीं और देखने को मिलता है । विशेष रूप से जानवरों के साथ बहुत सम्मान का बर्ताव किया जाता है ।

मेरी यात्रा के दौरान कई ड्राईवरों के साथ बैठना हुआ, मुझे बहुत अचम्भा हुआ कि किसी के रास्ता काटने पर या जिसे हम पश्चिम में ड्रायविंग की बुरी आदतें कहेंगे वह सब प्रर्दशन करने पर भी कोई किसी को कोस नहीं रहा था । वे बस एक दूसरे के साथ रास कर रहे थे- यह सचमुच एक नृत्य के समान है, और सब कुछ बहुत आकर्षक ढंग से होता है! यह केवल देखने में ही विस्मयकारी नहीं लगता बल्कि यह हम सबको किस प्रकार शांत रहना और बहाव के साथ चलना भी सिखाता है!

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Colorful facade of building in Little India, Singapore
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शायद मैंने भारत ही एकमात्र ऐसा स्थान देखा है जहां हर कोई कहीं भी सो सकता है: यातायात के बीच में, हाईवे के पास, रेल की पटरी पर या ऊँट गाड़ी पर । और ऐसा लगता है कि शांतिपूर्ण नींद के साथ इन लोगों, आमतौर पर भारतीयों में एक मन की शांति है जो कहीं और मिलनी दुर्लभ है ।

सभी शब्दों के अर्थों में वाकई भारत अविश्वसनीय है । और सबसे अद्भुत बात यह है कि यह चाहे कितना भी अव्यवस्थित लगे, सब काम होते दिखते हैं ।

अब समय है… यह सीखने का कि अव्यवस्थतता के बीच भी शांति और भिन्नता में एकता हो सकती है । जीवन में जो भी कुछ आपके पास है उसका भरपूर प्रयोग करें और भारतीयों की तरह जीवन में रास करते हुए आगे बढें!

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© ‘It’s Time…’ by Aruna Ladva, BK Publications London, UK

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