अंदाज़ा लगाना (Ass-u-me – in Hindi)

अंदाज़ा लगाना

OMG

अटकलबाज़ी और अनुमान लगाने के परिणामस्वरूप कितनी गल्तियाँ हो जाती हैं, और कितने सम्बन्ध टूट जाते हैं? ‘अटकलबाज़ी’ का अर्थ है अंतिम परिणाम का अंदाज़ा लगाना, और शायद गलत समझ लेना और एक पल में आपके आसपास हरेक को जोखिम में डाल देना । ध्यान रहे कि आप अनुमान नहीं लगाऐं! निस्संदेह आप ठीक हो सकते हैं लेकिन यह भी संभव है कि आप असली बात से बिल्कुल भटक गए हों!

इस सप्ताह बहुत सी ऐसी घटनाऐं हुईं जिसमें मेरे आसपास के लोगों ने बहुत सी बातों का अनुमान लगा लिया और निर्णय ले लिए! उदाहरण के लिए किसी से मेरी बात हो रही थी तो किसी दूसरे व्यक्ति ने संयोग से सुन ली और उसने गलती से अनुमान लगा लिया कि मैं उनसे नहीं मिलूँगी । उस व्यक्ति ने अपनी योजना बदल ली और चले गऐ । परिणामस्वरूप मैंने उस व्यक्ति की लंबे समय तक प्रतिक्षा की, मुझे इस बात का अहसास नहीं था कि वे जा चुके हैं । तो समय बर्बाद हुआ, भावनाऐं आहत हुईं, सिर्फ इसलिए कि एक व्यक्ति ने निष्कर्ष निकाल लिया । निस्संदेह हम सभी ने किसी न किसी समय पर यह किया है । हम अनुमान लगाते हैं कि फलाने व्यक्ति ने यह किया जो उन्हें नहीं करना चाहिऐ था, या कुछ नहीं किया जो उन्हें करना चाहिऐ था । फिर हम इल्ज़ाम लगाते हैं और वे परेशान हो जाते हैं (यह बिल्कुल ठीक भी है)! या हम अनुमान लगाते हैं कि कोई काम करने के पीछे फलाने व्यक्ति की मंशा असलियत से भिन्न है, और उनके प्रति हमारी भावनाऐं बदल जाती हैं (अनावश्यक रूप से!) ।

अक्सर कहा जाता है अनुमान जिसे अंग्रज़ी में (Ass-u-me) कहा जाता है जिसका अर्थ है स्वयं को और दूसरे को मूर्ख बनाना! और फिर भी हम ऐसा क्यों करते रहते हैं? यहाँ कुछ कारक हैं और शायद उपाय भी!

Do not make assumptions advice or reminder - text in white chalk on a vintage slate blackboard

हम अभिमानी हैं
हम चाहते हैं लोग हमें इस नज़र से देखें कि ये सब जानते हैं । और ठीक भी हैं । इसलिए हम अपने बायें मस्तिष्क की सोच के आधार पर उतावलेपन में बोल देते हैं । हम सोचते हैं कि बातें समझने में हम होशियार हैं और इससे पहले कि हम जान पाऐं हमने अपना अंतिम विचार प्रकट कर दिया होता है, जो हमें ठीक प्रतीत होता है, और दूसरे भी इस पर विश्वास करने लगते हैं ।

हम में स्वाभिमान की कमी है
किसी बात के बारे में हम अटकलें तब लगाते हैं जब हम उसे समझते नहीं । वह बात हमें कतई समझ नहीं आई और हमें लगता है कि हमें पूछने का या स्पष्ट करने का अधिकार नहीं है । बस हमें लगता है दूसरे सही कह रहे हैं और अगर हमें समझ नहीं आ रहा है तो हम ही मूर्ख हैं ।

हमें भय लगता है
हमें दोबारा पूछने में डर लगता है और उनको फिर से बात दोहराने को कहने में और अधिक डर लगता है; लोग हमें मूर्ख ना समझ लें इस भय से यह नहीं पूछते कि असल में करना क्या है!

Hole in Your Assumption words on puzzle pieces to illustrate a bad or wrong guess, suspicion, theory or expectation

हम सुनते हैं लेकिन ध्यान से नहीं सुनते
समय समय पर हम चयनात्मक सुनते हैं । हम वही सुनते हैं जो हम सुनना चाहते हैं । उदाहरण के लिए: हमें कुछ करने को कहा गया है, तो हम अनुमान लगाते हैं कि यह हरेक पर लागू होता हैं सिवाय मेरे!

यह बहुत महत्वपूर्ण है कि हम अपने स्वाभिमान में रहें और अपनी ओर से स्पष्ट संवाद करें । अगर हमें सम्पूर्ण तथ्यों के बारे में जानकारी नहीं है तो यह कहना बेहतर होगा कि, “मुझे नहीं मालूम”, और इससे स्वयं को छोटा नहीं समझना चाहिए । क्या सब स्पष्ट करके फिर सारी जानकारी के साथ अपना कार्य करना बेहतर नहीं होगा?

हमेशा ही वे लोग होंगे जो वे कहना चाहते हैं उसका स्पष्ट तरह संवाद नहीं करते । वे कुछ शब्दों में सूचना या निर्देश दे देते हैं क्योंकि वे जानते हैं कि वे क्या कहना चाहते हैं तो वे अनुमान लगा लेते हैं कि आप भी जानते हैं कि उनके दिमाग में क्या चल रहा है । इस सूरत में परिस्थिति को स्पष्ट कर लेना, अनुमान लगाने से बेहतर है, बेशक आप मूर्ख ही प्रतीत क्यों न हों ।

उदाहरण के लिए अगर आपका बॉस आपको कुछ निर्देश देता है जो स्पष्ट नहीं हैं और आप बिल्कुल समझ नहीं पा रहे हैं तो आप पूछें, “क्या आप स्पष्ट कर सकते हैं, बस मैं भली प्रकार समझना चाहता हूँ कि आप मुझसे क्या करवाना चाहते हैं?” मेरी बहन में मुझे याद दिलवाया कि उसके गणित के अध्यापक कहते थे, “जीवन भर बेवकूफ बने रहने से अच्छा है एक बार बन जाओ!”

इसी प्रकार जब आप दूसरों से संवाद कर रहे होते हैं तो ध्यान रखें कि शायद दूसरों को आपका संदर्भ समझ नहीं आऐ, इसलिए अंदाज़ा मत लगाऐं कि उनको आपके दिमाग के अंदर का पता है । अक्सर यह भूला दिया जाता है कि संवाद का 50 प्रतिशत हिस्सा यह निश्चित करना है कि दूसरे व्यक्ति को जो कुछ भी आप कहने की कोशिश कर रहे हैं वह उसे समझ आ जाये ।

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दूसरों को सुनते समय हमें ध्यान से सुनना चाहिऐ और मानसिक रूप से मौजूद रहना चाहिए । हमें कारणों और परिणामों के बारे में सचेत रहने की आवश्यकता है । उदाहरणार्थ, इस बात पर ध्यान दें कि क्या हो रहा है और यह वर्तमान और भविष्य को किस प्रकार प्रभावित करेगा । कभी कभी हम वास्तविकता से बेपरवाह अपनी ही असत्यता में जीते रहते हैं!

राजयोग का गहरा उपदेश है कि जो कुछ भी हो रहा है उसमें फायदा है । चाहे कुछ बातें लगें कि वे गलत हो रहीं हैं लेकिन हो सकता है ऐसा न हो । अनुमान लगाने से और परिणामस्वरूप गलतफहमियाँ हमारे लिए सबक हैं!

अब समय है… पूछने का, स्पष्ट करने का और संवाद करके जो कुछ भी करना है उसके बारे में स्पष्ट होने का । अनुमान नहीं लगाऐं ।

 

Listen to the Audio of ‘Ass-U-Me’ in English (Music by Deuter)

 

Take a few moment to meditate NOW – Everything is Good (Music by Deuter – Silver Cloud)

 

 

© ‘It’s Time…’ by Aruna Ladva, BK Publications London, UK

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