यह केवल प्रक्षेपण है – It’s Just Projection

यह केवल प्रक्षेपण है

क्या आपने कभी अनुभव किया है कि कुछ लोग कुछ विषयों पर बहुत बोझिल और गंभीर होते हैं । मुझे पक्का विश्वास है कि हर कोई एक ऐसे व्यक्ति‍ को जानता है । और अक्सर यह उनका स्वयं का कोई मुद्दा या संघर्ष होता है जो वे उनके आसपास के लोगों पर प्रक्षेपित करते हैं । यह भी एक कला है कि वे लोग क्या कह रहे हैं उस बात को सुनना बजाय कि प्रतिक्रिया देना और उसी समय यह जाँच करना कि: क्या वास्तव में इस बात का सम्बन्ध मुझ से है? इस ‘बात’ का ताल्लुक किस से है?

Listen in Hindi…

यह विचार बहुत स्वतंत्रता देने वाला है कि प्रत्येक अपनी यात्रा पर है और उनकी यात्रा मेरी यात्रा नहीं है । अगर हम इन बातों को ग्रहण करना नहीं चाहते तो हमें इस बात को निश्चित करना होगा कि हम भय, अपराध बोध या किसी भी नकारात्मक भावना की आवृति में नहीं रहना, तभी इस प्रकार की नकारात्मकता हमारी ओर आकर्षित नहीं होगी । यह हमारे अंदर घर नही करेगी । जब यह सब हमारे पास से गुज़रता है तो हमें इसका थोड़ा अहसास होता है लेकिन कोई बात नहीं । हम इसके प्रति जागरूक हैं, और इसको स्वीकार कर रहे हैं कि हाँ यह…गुज़र रहा है । इसे जाने दें ।

एक बार हम अपने भूतकाल से और स्वयं से शांति का सम्बन्ध स्थापित कर लेते हैं तो हम ‘स्वयं’ को पुरानी आदतों और योजनाओं से प्रभावशाली ढंग से मुक्त कर लेते हैं । दूसरों की अनाप-शनाप बातों को अपने भीतर लेने की कोई आवश्यकता नहीं है । पुरानी बातें, परिस्थितियाँ और दूसरे लोग – इन सबको अब अपने मन से निकाल दें ।

अब बस हमें खुश रहना है । अपने मन को खुश रखना है । जब हम दूसरों की कटू आलोचनाऐं स्वीकारना बंद कर देते हैं तो वे उनके पास ही रह जाती हैं । भूतकाल में हो सकता है कि आत्माऐं स्वयं अच्छा अनुभव करने के लिए अपनी ‘अनावश्यक बातों’ को मुझ पर डंप कर देती होंगी और मैं ग्रहण करती रहती थी । लेकिन अब मुझे ऐसा करने की आवश्यकता नहीं है, क्योंकि अब मैं सभी को खुश करने की कोशिश में नहीं हूँ । मैंने ‘लोगों को खुश करने वाले’ के पद से इस्तिफा दे दिया है ।

अगर कुछ भी आपकी परिक्षा लेने आता है तो स्वयं से पूछें: इस परिस्थिति या इस व्यक्ति से मुझे क्या सीखना है? अगर हालात अच्छे या भिन्न होते तो मैं इनसे क्या सीखती? भावनाओं को सकारात्मक, व्यक्तिगत और ऊर्जा से भरपूर रखें और वर्तमान में जीऐं । प्रतिदिन सकारात्मक दृढ़ वचनों के साथ मेडिटेशन के अभ्यास से भी मदद मिलती है ।

मैं खुशी अनुभव करती हूँ

मैं अच्छा अनुभव करती हूँ

मैं स्वतंत्र हूँ

मैं अपने जीवन में हर व्यक्ति और हर परिस्थिति का आनंद लेती हूँ

मेरा जीवन और मेरा संसार सुंदर है

जब हम अपना ध्यान अच्छा अनुभव करने पर टिका लेते हैं तो स्वत: ही अच्छा अनुभव करना आरम्भ कर देते हैं! फिर हम और अधिक सकारात्मकता को अपने जीवन में आकर्षित करते हैं । ये हमारे प्रत्यक्ष समाधान बन जाते हैं और ऐसा इसलिए हुआ क्योंकि हमने स्वयं पर आंतरिक कार्य किया है । मुख्य बात है अपना ध्यान स्वयं पर, स्वयं के विचारों पर और अपनी भावनाओं पर केंद्रित करना ।

स्वयं के बारे में सकारात्मक छवि उत्पन्न करना ही स्वयं को स्वीकारने और स्वयं को प्रेम करने की ओर मार्ग है । जब हम अपने और दूसरों के बारे में सकारात्मक वृत्ति और दृष्टि रखते हैं, तब हम स्वयं को दूसरे लोगों के प्रक्षेपण और राय से मुक्त रख सकते हैं ।

हाँ, दूसरों को अपनी दुख की भावनाओं के लिए और स्व-नियंत्रण की कमी के लिए दोषी ठहराना कम दुखदायक और सुविधाजनक है, क्योंकि यह हमें न्यायसंगत लगता है और इससे हम स्वयं के उपर मेहनत करने से भी छूट जाते हैं । और हाँ, कभी कभी अपने अंतर पर कार्य करना बहुत विशालकाय कार्य लगता है, विशेष रूप से जब हमें स्वयं की कमियों का सामना करने के लिए कोई स्रोत या हल करने की शक्ति नहीं है । यहीं पर मेडिटेशन की आवश्यकता है!

सकारात्मक रहिए तो जीवन बहुत हल्का रहेगा । परिस्थितियों के समय हमारा मार्गदर्शन करने के लिए हम अपनी भावनाओं और भावों का प्रयोग कर सकते हैं । कभी कभी हमें धैर्यता रखनी पड़ती है और हमें स्वयं का उत्साह बढ़ाने की आवश्यकता है । लेकिन हमेशा इस बात का ध्यान रखें कि: इस परिस्थिति में मेरे से सम्बन्धित कौन सी बात हैं (जिस का हल मुझे ढूँढना होगा) और कौन सी बात दूसरे मनुष्य से सम्बन्धित है? (जिसके बारे में मुझे सोचने की आवश्यकता नहीं)

अब समय है… स्वयं को दूसरों के प्रक्षेपण से स्वतंत्र करने का । हल्का रहना है और अपने मन और भावनाओं के प्रति चौकस रहना है । जो कुछ भी बाहर है उसे अपने भीतर भावनात्मक हलचल पैदा न करने दें ।

 

By a contributing Author

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