भगवान निष्क्रय नहीं है – God is not Idle! (in Hindi)

भगवान निष्क्रय नहीं है

अक्सर आवश्यकता के समय हम भगवान को याद करते हैं, यह सोचकर, विश्वास कर कि वह हमारे लिए खाली बैठा है और हमारे बुलावे की प्रतिक्षा कर रहा है… जैसे कि उसके पास करने को कुछ है नहीं । पर मुझे नहीं लगता कि ऐसा है । हाँ, किसी ने एक मूर्ति के रूप में उसे खरीदा होगा लेकिन निश्चित रूप से वह खाली नहीं बैठा है!

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भगवान के रोल को लेकर युगों से अनेक प्रकार की व्याख्या चली आई है । कुछ विश्वास करते हैं कि वह सर्वव्यापी है, हर जगह और हरेक वस्तु में हैं, हर पत्थर और हर कण में है । कुछ मानते हैं कि धरती माँ और इसकी सारी रचना ही भगवान है । कुछ का मानना है कि वह बहुत बहुत दूर हमारी आँखों से और हमारी पहुँच से दूर रहता है । जो भी मत हो लेकिन एक बात हम सब जानते हैं कि वह ऊँचे से ऊँचा है ।

मैं इस बात का दावा नहीं कर रही कि मैं नए ज़माने की गुरू हूँ जो सब कुछ जानती है और जो भगवान की निजी सहायक है! लेकिन मैं अपने दिल पर अपना हाथ रख कर कह सकती हूँ कि वह मेरा बहुत करीबी साथी है और जब भी मैं उसे बुलाती हूँ वह मेरे लिए हमेशा हाज़िर है । और मेरा विश्वास है कि वह दूर या दुगर्म नहीं है । बल्कि इसके उल्टा, वह उस हरेक के लिए मौजूद है जो उसे पुकारता है । अगर हम विश्वास नहीं करते कि वह हमारे लिए मौजूद है तो ऐसा शायद इसलिए है कि वह इस बात की प्रतिक्षा कर रहा है कि पहला कदम हम उठाऐं । वह मदद के लिए सदैव तैयार है, लेकिन हमें सक्रिय होना होगा, माँगना होगा और प्राप्त करना होगा । हमें भीख माँगने की आवश्यकता नहीं है लेकिन बल्कि हमें अपने स्वमान में रहना है ।

भारत के महान महाकाव्य महाभारत में परमात्मा की ओर से हमारे प्रेम के बदले में प्रेम लौटाने का एक उदाहरण है । द्रौपदी (पाँडवों की पत्नि) ने कृष्ण (परमात्मा का स्वरूप) की मदद की थी और उसने उस अहसान को कई गुणा चुकाया था । कहानी इस प्रकार है कि कृष्ण द्रौपदी के संग पतंग उड़ा रहे थे और उनकी अँगुली पतंग की रस्सी से कट गई । यह देख कर तुरंत द्रौपदी ने अपनी साड़ी से कपड़े का टुकड़ा फाड़ा और उससे घाव पर पट्टी बांध दी । इस देखरेख और समर्पण ने कृष्ण का हृदय छू लिया । बाद में कौरव (बुरे लोग) द्रौपदी को नग्न करने लगे । उसने कृष्ण को मदद के लिए गुहार लगाई तो उसने आसमान में उतनी साड़ियों का निर्माण कर दिया जितने धागे उस पट्टी में थे, और इस प्रकार कौरव उसे नग्न नहीं कर पाए, और उसका सम्मान बना रहा । यह कहानी इस बात का मिसाल है कि भगवान के लिए हम बहुत थोड़ा कुछ भी करते हैं और प्रेम से करते हैं तो वह उन भक्तिमय भावनाओं का फल कई गुणा देता है ।

मैं मानती हूँ कि अच्छे कार्य करने के हमें बहुत मौके मिलते हैं और जब हम उनको करने की हिम्मत करते हैं तो असल में हम अपना ही बेहतर भाग्य बनाते हैं । वह तो हमारे छोटे से पुरूषार्थ को भी स्वीकार करता है और बदले में हमारे जीवन को बहुत तरह से सम्पन्न बना कर उसका कई गुणा फल देता है ।

भगवान तैयार है और सबको देना चाहता है । उसका खज़ाना प्रचुर और भरपूर है । जो भी और जैसा भी किसी आत्मा को चाहिए वह सब उसके पास उपलब्ध है । वह आख़िरी दुकान है जिस पर सब कुछ मिलता है! तो चलिए प्रेम से, जितनी बार हो सके उतनी बार उससे जुड़ जाते हैं । उसकी शक्ति, प्रेम और प्रकाश के प्रकम्पन्नों को महसूस करें और सारा दिन इस प्रेमपूर्ण जागरूकता में रहें ।

भगवान प्रेम का सागर है, और हमारे किसी भी व्यवहार के बावजूद अविचल रूप से अपना प्रेम हमें प्रदान करते हैं । इसलिए ही भगवान भगवान है । वह देता है और भूल जाता है । उसके नियम ही उसका प्रेम है । परन्तु, अगर हमें नज़दीक जाना है तो पहला कदम हमें उठाना होगा । मार्गदर्शन के लिए इधर उधर देखने के बजाय ऊपर देखें!

भगवान को याद करने से स्वत: ही हम अपनी उन अच्छाईओं को भी याद करते हैं जिनके साथ हम इस संसार में आऐ हैं, जैसे प्रेम, शांति और खुशी जो हमारा जन्म सिद्ध अधिकार है ।

जो कुछ भी हमें चाहिए उसे देने में भगवान निष्क्रिय नहीं है, और इसलिए उसे स्वीकार करने में या उसके बेहद खज़ाने से जितना भी ले सकें उसे लेने में हमें भी निष्क्रिय नहीं बनना है!

अब समय है… भगवान के लिए समय निकालने का । उसके प्रेम, प्रकाश और उपस्थिति को जीवन में महसूस करने का । उसके लिए, उसके नाम से एक छोटा सा कार्य करें और उसका इनाम कई गुणा प्राप्त होगा!

 

© ‘It’s Time…’ by Aruna Ladva, BK Publications London, UK

 

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2 Responses to “भगवान निष्क्रय नहीं है – God is not Idle! (in Hindi)”

  • Thanks for the nice information, very true and useful, will try to incorporate in practice

    Reply
  • harpal singh

    Om shanti Divine Sister, many many thanks for this and many of your articles and presentations, all very nice, informative and useful; i wish you share your experience more about Gods attributes ie. how God is ocean of different virtues and souls original qualities and how the souls can get the maximum.
    regards

    Reply

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